आज भी हारी हुई बाजी खेलना पसंद है हमें, क्यों की हम तकदीर से ज्यादा खुद पे भरोसा करते है|

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किसी व्यक्ति के प्रति इतना भी समर्पण नही होना चाहिये की आप स्वयं को धीरे धीरे खोने लगे

"हुनर" होगा तो दुनिया खुद कदर करेगी "एड़ियाँ" उठाने से किरदार ऊँचे नही होते..

जिस काम में काम करने की हद पार ना हो फिर वो काम किसी काम का नही

नींद और निंदा पर जो विजय पा लेते है उन्हें आगे बढ़ने से कोई नही रोक सकता

शीशे की तरह चरित्रवान बनो ताकि लोग तुम्हे देखकर अपने चरित्र के दोषों को दूर करें जैसा कि वे शीशे को देखकर अपने चेहरे के दोषों को दूर करते हैं

झूठ का भी अजीब 'जायका' है स्वयं बोलो तो मीठा' लगता है कोई और बोले तो 'कड़वा'

किसी व्यक्ति के प्रति इतना भी समर्पण नही होना चाहिये की आप स्वयं को धीरे धीरे खोने लगे

"हुनर" होगा तो दुनिया खुद कदर करेगी "एड़ियाँ" उठाने से किरदार ऊँचे नही होते..

जिस काम में काम करने की हद पार ना हो फिर वो काम किसी काम का नही

नींद और निंदा पर जो विजय पा लेते है उन्हें आगे बढ़ने से कोई नही रोक सकता

शीशे की तरह चरित्रवान बनो ताकि लोग तुम्हे देखकर अपने चरित्र के दोषों को दूर करें जैसा कि वे शीशे को देखकर अपने चेहरे के दोषों को दूर करते हैं

झूठ का भी अजीब 'जायका' है स्वयं बोलो तो मीठा' लगता है कोई और बोले तो 'कड़वा'