ख्वाहिशे कुछ कुछ यु भी अधूरी रही पाहिले उम्र नहीं थी अब उम्र नहीं रही

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जान तक देने की बात करते हैं यह लोग सच कहु तो दिल से दुआ भी नहीं करते

मै तुमको भूल तो जाऊं मगर छोटी सी उलझन है.. सुना है... दिल से धड़कन की जुदाई मौत होती है ..!

डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो..... और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया

रोते हैं वो लोग जो मोहब्बत को दिल से निभाते हैं धोखा देने वाले तो दिल तोड़ कर अक्सर चैन से सो जाते हैं

युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे…पता नही था की, ‘किमत चेहरों की होती है’ !

कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!

जान तक देने की बात करते हैं यह लोग सच कहु तो दिल से दुआ भी नहीं करते

मै तुमको भूल तो जाऊं मगर छोटी सी उलझन है.. सुना है... दिल से धड़कन की जुदाई मौत होती है ..!

डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो..... और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया

रोते हैं वो लोग जो मोहब्बत को दिल से निभाते हैं धोखा देने वाले तो दिल तोड़ कर अक्सर चैन से सो जाते हैं

युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे…पता नही था की, ‘किमत चेहरों की होती है’ !

कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!