कभी ना कहो की दिन अपने ख़राब है। समझ लो की हम काँटों से घिर गए गुलाब है।।
चिंता उतनी करो की काम हो जाये..इतनी नही की ज़िन्दगी तमाम हो जाये
खुद वो बदलाव बनिए जो दुनिया में आप देखना चाहते हैं
जो लोग मिली हुई चीज को छोड़कर उस चीज के पीछे भागते है
सफलता के लिए सिर्फ कल्पना ही नहीं, सार्थक कर्म भी जरूरी है सीढ़ियों को देखते रहना ही पर्याप्त नहीं है, सीढ़ियों पर चढ़ना भी जरूरी है.
उलझने मैंने कई झुक के भी सुलझायी है लोग सारे तो कद के बराबर नही होते
कभी ना कहो की दिन अपने ख़राब है। समझ लो की हम काँटों से घिर गए गुलाब है।।
चिंता उतनी करो की काम हो जाये..इतनी नही की ज़िन्दगी तमाम हो जाये
खुद वो बदलाव बनिए जो दुनिया में आप देखना चाहते हैं
जो लोग मिली हुई चीज को छोड़कर उस चीज के पीछे भागते है
सफलता के लिए सिर्फ कल्पना ही नहीं, सार्थक कर्म भी जरूरी है सीढ़ियों को देखते रहना ही पर्याप्त नहीं है, सीढ़ियों पर चढ़ना भी जरूरी है.
उलझने मैंने कई झुक के भी सुलझायी है लोग सारे तो कद के बराबर नही होते