सफलता हमारा परिचय दुनिया को करवाती है और असफलता हमें दुनिया का परिचय करवाती है.

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पहले लोगोँ ने सिखाया था कि वक्त बदल जाता है अब वक्त ने सिखा दिया कि लोग भी बदल जाते हैँ

भोजन महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है कार्य व उसके प्रति निष्ठा. पेट तो जानवर भी भर लेते हैं. अतः मानव बनो.

"उन व्यक्तियों के जीवन में आनंद और शांति कई गुणा बढ़ जाती है.! जिन्होंने प्रशंसा और निंदा में एक जैसा रहना सीख लिया है.

कई जीत बाकी है कई हार बाकी है, अभी तो जिंदगी का सार बाकी है। यहां से चले हैं नई मंजिल के लिए, यह तो एक पन्ना था अभी तो पुरी किताब बाकी है॥

जिसका हृदय सभी प्राणियों के लिए दया से परिपूर्ण है उसे ज्ञान, मोक्ष, जटा, भस्म- लेपन आदि से क्या लेना देना.

मन में नित्य रहने वाले छः शत्रु – काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद तथा मात्सर्य को जो वश में कर लेता है, वह जितेन्द्रिय पुरुष पापों से ही लिप्त नहीं होता, फिर उनसे उत्पन्न होने वाले अनर्थों की तो बात ही क्या है।

पहले लोगोँ ने सिखाया था कि वक्त बदल जाता है अब वक्त ने सिखा दिया कि लोग भी बदल जाते हैँ

भोजन महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है कार्य व उसके प्रति निष्ठा. पेट तो जानवर भी भर लेते हैं. अतः मानव बनो.

"उन व्यक्तियों के जीवन में आनंद और शांति कई गुणा बढ़ जाती है.! जिन्होंने प्रशंसा और निंदा में एक जैसा रहना सीख लिया है.

कई जीत बाकी है कई हार बाकी है, अभी तो जिंदगी का सार बाकी है। यहां से चले हैं नई मंजिल के लिए, यह तो एक पन्ना था अभी तो पुरी किताब बाकी है॥

जिसका हृदय सभी प्राणियों के लिए दया से परिपूर्ण है उसे ज्ञान, मोक्ष, जटा, भस्म- लेपन आदि से क्या लेना देना.

मन में नित्य रहने वाले छः शत्रु – काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद तथा मात्सर्य को जो वश में कर लेता है, वह जितेन्द्रिय पुरुष पापों से ही लिप्त नहीं होता, फिर उनसे उत्पन्न होने वाले अनर्थों की तो बात ही क्या है।