तकलीफ़े भी अच्छी है..
वहाँ हो जाता है सन्नाटा एक दिन जहाँ हर वक़्त पैसा बोलता है
"बदलना" ख़राब नहीं हैं , ख़राब हैं बदल कर , पहले से "बदतर" हो जाना
मुश्किलें दिलों के इरादों को आजमाएंगी, आँखों के पर्दों को निगाहों से हटाएँगी, गिरकर भी हम को संभलना होगा, ये ठोकरें ही हमको चलना सिखाएंगी।
लोग जब पूछते है कि आप क्या काम करते है तो असल में वो हिसाब लगाते है कि आपको कितनी इज़्ज़त देनी है
किसी भी कार्य में पल भर का भी विलम्ब न करें।
तकलीफ़े भी अच्छी है..
वहाँ हो जाता है सन्नाटा एक दिन जहाँ हर वक़्त पैसा बोलता है
"बदलना" ख़राब नहीं हैं , ख़राब हैं बदल कर , पहले से "बदतर" हो जाना
मुश्किलें दिलों के इरादों को आजमाएंगी, आँखों के पर्दों को निगाहों से हटाएँगी, गिरकर भी हम को संभलना होगा, ये ठोकरें ही हमको चलना सिखाएंगी।
लोग जब पूछते है कि आप क्या काम करते है तो असल में वो हिसाब लगाते है कि आपको कितनी इज़्ज़त देनी है
किसी भी कार्य में पल भर का भी विलम्ब न करें।