साहब, घायल तो यहाँ हर एक परिंदा है मगर जो फिरसे उड़ सका वही जिन्दा है

साहब, घायल तो यहाँ हर एक परिंदा है मगर जो फिरसे उड़ सका वही जिन्दा है

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घाव को भरने के लिए आपको उसे छूना बंद करना होगा

कभी गिर जाओ तो खुद ही उठ जाना, क्यूँकी लोग सिर्फ गिरे हुए पैसे उठाते है इंसान नहीं

जब सोच में मोच आती है तब हर रिश्ते में खरोंच आती हैं...

'श्रद्धा' ज्ञान देती हैं, 'नम्रता' मान देती हैं, 'योग्यता' स्थान देती हैं पर तीनों मिल जाए तो... व्यक्ति को हर जगह 'सम्मान' देती हैं...!

" समय " और " शब्द ' दोनों का उपयोग " लापरवाही " से ना करें क्योंकि ये " दोनों " ना दुबारा आते हैं ना " मौका " देते है !

“हमें किसी भी ख़ास समय के लिए इन्तजार नहीं करना चाहिए बल्कि अपने हर समय को ख़ास बनाने की पूरी तरह से कोशिश करनी चाहिए।”

घाव को भरने के लिए आपको उसे छूना बंद करना होगा

कभी गिर जाओ तो खुद ही उठ जाना, क्यूँकी लोग सिर्फ गिरे हुए पैसे उठाते है इंसान नहीं

जब सोच में मोच आती है तब हर रिश्ते में खरोंच आती हैं...

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“हमें किसी भी ख़ास समय के लिए इन्तजार नहीं करना चाहिए बल्कि अपने हर समय को ख़ास बनाने की पूरी तरह से कोशिश करनी चाहिए।”