साहब, घायल तो यहाँ हर एक परिंदा है मगर जो फिरसे उड़ सका वही जिन्दा है

साहब, घायल तो यहाँ हर एक परिंदा है मगर जो फिरसे उड़ सका वही जिन्दा है

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इज़्ज़त, मोहब्बत, तारीफ़ और दुआ...माँगी नहीं जाती, कमाई जाती है...।।

पतझड़ में सिर्फ पत्ते गिरते हैं, नज़रों से गिरने का कोई मौसम नहीं होता

काबिलियत इतनी बढ़ाओ की तुम्हे हराने के लिए कोशिश नहीं साजिश करनी पड़े.

कोई कितना भी झूठा और कपटी हो आपके साथ आप तब भी सच्चे बने रहिए क्योंकि किसी बीमार को देखकर स्वयं को बीमार कर लेना ये समझदारी नही मूर्खता है..

हर कल जिंदगी जीने का दूसरा मौका है

मुस्किले आसानी से हल हो सकती तो मुश्किले ना कहलाती

इज़्ज़त, मोहब्बत, तारीफ़ और दुआ...माँगी नहीं जाती, कमाई जाती है...।।

पतझड़ में सिर्फ पत्ते गिरते हैं, नज़रों से गिरने का कोई मौसम नहीं होता

काबिलियत इतनी बढ़ाओ की तुम्हे हराने के लिए कोशिश नहीं साजिश करनी पड़े.

कोई कितना भी झूठा और कपटी हो आपके साथ आप तब भी सच्चे बने रहिए क्योंकि किसी बीमार को देखकर स्वयं को बीमार कर लेना ये समझदारी नही मूर्खता है..

हर कल जिंदगी जीने का दूसरा मौका है

मुस्किले आसानी से हल हो सकती तो मुश्किले ना कहलाती