दोस्ती करनी हो तो गणित के जीरो जैसी करो साहब जिसके साथ मिल जाओ उसकी कीमत बढ़ जाये
चुप रहना कुछ कहने से बेहतर है अगर सामने वाला समझता ही ना हो तुम्हे
जी लो हर लम्हा बीत जाने से पहले लौट कर सिर्फ यादें आती हैं वक़त नहीं
फिल्टर सिर्फ चित्र का होता है
जो 'इन्सान' आपकी खुशी के लिये 'हार' मान लेता है उससे आप कभी 'जीत' नही सकते
सिर्फ उतना ही विनम्र बनो जितना जरुरी हो............ बेवजह विनम्रता दूसरों के अहम को बढ़ावा देती है!!
दोस्ती करनी हो तो गणित के जीरो जैसी करो साहब जिसके साथ मिल जाओ उसकी कीमत बढ़ जाये
चुप रहना कुछ कहने से बेहतर है अगर सामने वाला समझता ही ना हो तुम्हे
जी लो हर लम्हा बीत जाने से पहले लौट कर सिर्फ यादें आती हैं वक़त नहीं
फिल्टर सिर्फ चित्र का होता है
जो 'इन्सान' आपकी खुशी के लिये 'हार' मान लेता है उससे आप कभी 'जीत' नही सकते
सिर्फ उतना ही विनम्र बनो जितना जरुरी हो............ बेवजह विनम्रता दूसरों के अहम को बढ़ावा देती है!!