वक़्त की ताक़त तुम क्या समझोगे ये उसका भी हो जाता है जिसका कोई नहीं होता।
ज़िन्दगी बीत जाएगी चार दिन में इसे अपने में नहीं जिओ बल्कि अपनों के साथ जियो।
नसीहत वो सच्ची बातें हैं, जिन्हें हम कभी ध्यान से नहीं सुनते। और … तारीफ वह धोखा है, जिसे हम पूरे ध्यान से सुनते हैं, और अपने आप पर झूठा घमंड करते हैं।
वो लोग अच्छे वक़्त में तुम्हारे साथ रहने के काबिल नहीं है जिन्होंने तुम्हारे बुरे वक़्त में तुम्हारा साथ छोड़ दिया था।
कुछ बातो से अंजान रहना ही अच्छा है......! कभी कभी सब कुछ जान लेना भी तकलीफ़ देता है......!
रिश्ते बरकरार रखने की सिर्फ एक ही शर्त है , भावना देखें , संभावना नहीं !!
वक़्त की ताक़त तुम क्या समझोगे ये उसका भी हो जाता है जिसका कोई नहीं होता।
ज़िन्दगी बीत जाएगी चार दिन में इसे अपने में नहीं जिओ बल्कि अपनों के साथ जियो।
नसीहत वो सच्ची बातें हैं, जिन्हें हम कभी ध्यान से नहीं सुनते। और … तारीफ वह धोखा है, जिसे हम पूरे ध्यान से सुनते हैं, और अपने आप पर झूठा घमंड करते हैं।
वो लोग अच्छे वक़्त में तुम्हारे साथ रहने के काबिल नहीं है जिन्होंने तुम्हारे बुरे वक़्त में तुम्हारा साथ छोड़ दिया था।
कुछ बातो से अंजान रहना ही अच्छा है......! कभी कभी सब कुछ जान लेना भी तकलीफ़ देता है......!
रिश्ते बरकरार रखने की सिर्फ एक ही शर्त है , भावना देखें , संभावना नहीं !!