इंसान तो घर घर में पैदा होता है बस इंसानियत कही-कही जन्म लेती है

इंसान तो घर घर में पैदा होता है बस इंसानियत कही-कही जन्म लेती है

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रिश्ते वो होते हैं जिसमे शब्द कम और समझ ज्यादा हो......

एक दिन हम सब एक दूसरे को सिर्फ यह सोचकर खो देगे की वो मुझे याद नहीं करता तो मे क्यों करू .

जरा देखो तो, ये दरवाजे पर दस्तक किसने दी है! 'इश्क' हो तो कहना, अब दिल यहाँ नहीं रहता…

दिमाग पर ज़ोर लगाकर गिनते हो गलतियां मेरी कभी दिल पर हाथ रख के पूछना कसूर किसका है

गिरते हुए पत्त्तों ने मुझे यह समझाया हैं बोझ बन जाओ तो अपनो भी गिरा देते हैं .

तुमसे दिल लगा कर देख लिया अब और क्या देखने को बाक़ी है |

रिश्ते वो होते हैं जिसमे शब्द कम और समझ ज्यादा हो......

एक दिन हम सब एक दूसरे को सिर्फ यह सोचकर खो देगे की वो मुझे याद नहीं करता तो मे क्यों करू .

जरा देखो तो, ये दरवाजे पर दस्तक किसने दी है! 'इश्क' हो तो कहना, अब दिल यहाँ नहीं रहता…

दिमाग पर ज़ोर लगाकर गिनते हो गलतियां मेरी कभी दिल पर हाथ रख के पूछना कसूर किसका है

गिरते हुए पत्त्तों ने मुझे यह समझाया हैं बोझ बन जाओ तो अपनो भी गिरा देते हैं .

तुमसे दिल लगा कर देख लिया अब और क्या देखने को बाक़ी है |