तकदीर ऐसे ही नहीं बदलती, पहले अपनी सोच को बदलना पड़ता है .
अधर्म बुद्धि से आत्मविनाश की सुचना मिलती है।
कमियां भले ही हज़ारों हो तुममे लेकिन खुद पर विश्वाश रखो की तुम सबसे बेहतर करने का हुनर रखते हो
ईश्वर ना काष्ठ में है, न मिट्टी में, न ही मूर्ति में. वह केवल भावना में होता है. अतः भावना ही मुख्य है.
हम रिश्तों को और अधिक बेहतरीन बना सकते है अपनी सोच में छोटा सा बदलाव करके कि सामने वाला गलत नही है सिर्फ हमारी उम्मीद से थोड़ा अलग हैं
लंबी छलांगों से कही बेहतर है निरंतर बढ़ते कदम... जी एक दिन आपको मंजिल तक ले जाएंगे
तकदीर ऐसे ही नहीं बदलती, पहले अपनी सोच को बदलना पड़ता है .
अधर्म बुद्धि से आत्मविनाश की सुचना मिलती है।
कमियां भले ही हज़ारों हो तुममे लेकिन खुद पर विश्वाश रखो की तुम सबसे बेहतर करने का हुनर रखते हो
ईश्वर ना काष्ठ में है, न मिट्टी में, न ही मूर्ति में. वह केवल भावना में होता है. अतः भावना ही मुख्य है.
हम रिश्तों को और अधिक बेहतरीन बना सकते है अपनी सोच में छोटा सा बदलाव करके कि सामने वाला गलत नही है सिर्फ हमारी उम्मीद से थोड़ा अलग हैं
लंबी छलांगों से कही बेहतर है निरंतर बढ़ते कदम... जी एक दिन आपको मंजिल तक ले जाएंगे