अभिमान मत करो कि मुझे किसी की ज़रूरत नही आत्मनिर्भर बनो की में कर सकता हु हर चीज़ पर वहम भी नही की मेरे बिना कुछ हो नही सकता
किसी वृक्ष को काटने के लिए आप मुझे छ: घंटे दीजिये और मैं पहले चार घंटे कुल्हाड़ी की धार तेज करने में लगाऊंगा
इंसान को अलार्म नही, जिम्मेदारियां जगाती है
"इतने बड़े बनो कि जब आप खड़े हों तो कोई बैठा न रहे !"
अपने अंदर से अहंकार को निकालकर स्वयं को हल्का किजिये क्योंकि ऊँचा वही उठता है जो हल्का होता है।
हो सके तो कभी किसी से जलना मत क्योंकि ऊपर वाला जिसे देता है उसे अपने खजाने में से देता है तुमसे छीन के नही देता
अभिमान मत करो कि मुझे किसी की ज़रूरत नही आत्मनिर्भर बनो की में कर सकता हु हर चीज़ पर वहम भी नही की मेरे बिना कुछ हो नही सकता
किसी वृक्ष को काटने के लिए आप मुझे छ: घंटे दीजिये और मैं पहले चार घंटे कुल्हाड़ी की धार तेज करने में लगाऊंगा
इंसान को अलार्म नही, जिम्मेदारियां जगाती है
"इतने बड़े बनो कि जब आप खड़े हों तो कोई बैठा न रहे !"
अपने अंदर से अहंकार को निकालकर स्वयं को हल्का किजिये क्योंकि ऊँचा वही उठता है जो हल्का होता है।
हो सके तो कभी किसी से जलना मत क्योंकि ऊपर वाला जिसे देता है उसे अपने खजाने में से देता है तुमसे छीन के नही देता