जीत की आदत अच्छी है, मगर कुछ रिश्तों में हार जाना बेहतर है
इंसान वो लड़ाई कभी नहीं जीत सकता जिसमें दुश्मन उसके अपने हो
मुर्ख की यह प्रव्रत्ति है कि वह सदैव उन लोगों का अपमान करता है जो विद्या, शील, आयु। बुद्धि, धन और कुल में श्रेष्ट हैं तथा माननीय हैं।
ईश्वर सिर्फ दिशा दिखा सकता है उस पथ पर चलना, हमारा काम है और वास्तविकता में अगर तुम चलना ही नहीं चाहते फिर तुम्हारा ईश्वर को दोष देना व्यर्थ है!
अगर ज़िन्दगी में सुकून चाहते हो तो लोगों की बातों को दिल से लगाना छोड़ दो
लिबास कितना भी किमती हो घटीया किरदार को छुपा नहीं सकता
जीत की आदत अच्छी है, मगर कुछ रिश्तों में हार जाना बेहतर है
इंसान वो लड़ाई कभी नहीं जीत सकता जिसमें दुश्मन उसके अपने हो
मुर्ख की यह प्रव्रत्ति है कि वह सदैव उन लोगों का अपमान करता है जो विद्या, शील, आयु। बुद्धि, धन और कुल में श्रेष्ट हैं तथा माननीय हैं।
ईश्वर सिर्फ दिशा दिखा सकता है उस पथ पर चलना, हमारा काम है और वास्तविकता में अगर तुम चलना ही नहीं चाहते फिर तुम्हारा ईश्वर को दोष देना व्यर्थ है!
अगर ज़िन्दगी में सुकून चाहते हो तो लोगों की बातों को दिल से लगाना छोड़ दो
लिबास कितना भी किमती हो घटीया किरदार को छुपा नहीं सकता