असल में वही जीवन की चाल समझता है जो सफ़र में धुल को गुलाल समझता है

असल में वही जीवन की चाल समझता है जो सफ़र में धुल को गुलाल समझता है

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लोगो के मुँह बंद करने से अच्छा है अपने कान बंदकरलो

"जब तक किसी काम  को किया नहीं जाता     तब तक वह असंभव  ही लगता है

तुम्हे अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी होगी क्युकि लोग बुरे वक़्त में सिर्फ सलाह देते है साथ नहीं

जो लोग आपको सिर्फ काम के वक़्त याद करते है उन लोगो के काम जरूर आओ क्योंकि वो अंधेरे में रोशनी ढूंढते है और वह रोशनी आप हो..

विदेश में विद्या मित्र के समान होती है, औषधि रोगियों कि मित्र होती है, पत्नी घर में मित्र होती है और मृतक का मित्र होता है- धर्म .

तेरे गिरने में तेरी हार नहीं तू इंसान है, अवतार नहीं गिर, उठ, चल, दौड़ फिर भाग क्योंकि जीवन संक्षिप्त है इसका कोई सार नहीं.

लोगो के मुँह बंद करने से अच्छा है अपने कान बंदकरलो

"जब तक किसी काम  को किया नहीं जाता     तब तक वह असंभव  ही लगता है

तुम्हे अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी होगी क्युकि लोग बुरे वक़्त में सिर्फ सलाह देते है साथ नहीं

जो लोग आपको सिर्फ काम के वक़्त याद करते है उन लोगो के काम जरूर आओ क्योंकि वो अंधेरे में रोशनी ढूंढते है और वह रोशनी आप हो..

विदेश में विद्या मित्र के समान होती है, औषधि रोगियों कि मित्र होती है, पत्नी घर में मित्र होती है और मृतक का मित्र होता है- धर्म .

तेरे गिरने में तेरी हार नहीं तू इंसान है, अवतार नहीं गिर, उठ, चल, दौड़ फिर भाग क्योंकि जीवन संक्षिप्त है इसका कोई सार नहीं.