हम जो सोचते हैं, वो बन जाते हैं
जी लो हर लम्हा बीत जाने से पहले लौट कर सिर्फ यादें आती हैं वक़त नहीं
लहज़े कब तक मीठे रखने है आजकल ये ज़रूरतें तय करती है
"ज़िन्दगी" में कभी किसी "बुरे दिन" से सामना हो जाये तो इतना "हौसला" जरूर रखना "दिन" बुरा था "ज़िन्दगी" नहीं
सुख का ताला केवल और केवल संतुष्टि की चाभी से खुलता है
आप अपनी जिंदगी में जिन लोगों को रखते है उन्हे बहुत ध्यान से चुनो
हम जो सोचते हैं, वो बन जाते हैं
जी लो हर लम्हा बीत जाने से पहले लौट कर सिर्फ यादें आती हैं वक़त नहीं
लहज़े कब तक मीठे रखने है आजकल ये ज़रूरतें तय करती है
"ज़िन्दगी" में कभी किसी "बुरे दिन" से सामना हो जाये तो इतना "हौसला" जरूर रखना "दिन" बुरा था "ज़िन्दगी" नहीं
सुख का ताला केवल और केवल संतुष्टि की चाभी से खुलता है
आप अपनी जिंदगी में जिन लोगों को रखते है उन्हे बहुत ध्यान से चुनो