थक कर ना बैठ ऐ मंज़िल के मुसाफिर, मंज़िल भी मिलेगी और मिलने का मजा भी आयेगा !!
तेरे गिरने में तेरी हार नहीं तू इंसान है,अवतार नहीं गिर,उठ,चल,दौड़ फिर भाग क्योंकि जीवन संक्षिप्त है इसका कोई सार नही
जीवन मैं एक बार जो फैसला कर लो तो फिर पीछे मुड़कर मत देखना क्योंकि पलट कर देखने वाले इतिहास नहीं बनाते
मुश्किलें दिलों के इरादों को आजमाएंगी, आँखों के पर्दों को निगाहों से हटाएँगी, गिरकर भी हम को संभलना होगा, ये ठोकरें ही हमको चलना सिखाएंगी।
अत्यधिक उम्मीद को विराम दो, मन की शांति फिर से वापिस लौट आएगी
किसी को मनाने से पहले यह ज़रूर जान लेना कि वो तुमसे नाराज़ है कि ....परेशान....
थक कर ना बैठ ऐ मंज़िल के मुसाफिर, मंज़िल भी मिलेगी और मिलने का मजा भी आयेगा !!
तेरे गिरने में तेरी हार नहीं तू इंसान है,अवतार नहीं गिर,उठ,चल,दौड़ फिर भाग क्योंकि जीवन संक्षिप्त है इसका कोई सार नही
जीवन मैं एक बार जो फैसला कर लो तो फिर पीछे मुड़कर मत देखना क्योंकि पलट कर देखने वाले इतिहास नहीं बनाते
मुश्किलें दिलों के इरादों को आजमाएंगी, आँखों के पर्दों को निगाहों से हटाएँगी, गिरकर भी हम को संभलना होगा, ये ठोकरें ही हमको चलना सिखाएंगी।
अत्यधिक उम्मीद को विराम दो, मन की शांति फिर से वापिस लौट आएगी
किसी को मनाने से पहले यह ज़रूर जान लेना कि वो तुमसे नाराज़ है कि ....परेशान....