आँखों को अक्सर वही चीज़े पसंद आती है, जिसका मिलना मुश्किल हो..

आँखों को अक्सर वही चीज़े पसंद आती है, जिसका मिलना मुश्किल हो..

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वो निभा रही थी मोहब्बत अच्छे से.. कभी इधर... कभी उधर..

न जाने कौन सा आँसू मेरा राज़ खोल दे, हम इस ख़्याल से नज़रें झुकाए बैठे हैं।

लिखना तो ये था कि खुश हूँ तेरे बगैर भी, पर कलम से पहले आँसू कागज़ पर गिर गया

जो सूखी टहनियों में नमी बची है ना उसी को याद कहते हैं।

बहुत ज्यादा हॅसने और खुश नज़र आने वाले लोग…. अंदर से टूटे होते है

जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की, जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई।

वो निभा रही थी मोहब्बत अच्छे से.. कभी इधर... कभी उधर..

न जाने कौन सा आँसू मेरा राज़ खोल दे, हम इस ख़्याल से नज़रें झुकाए बैठे हैं।

लिखना तो ये था कि खुश हूँ तेरे बगैर भी, पर कलम से पहले आँसू कागज़ पर गिर गया

जो सूखी टहनियों में नमी बची है ना उसी को याद कहते हैं।

बहुत ज्यादा हॅसने और खुश नज़र आने वाले लोग…. अंदर से टूटे होते है

जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की, जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई।