जिंदगी को हमेशा मुस्कुरा कर गुजारो, क्युकी आप नहीं जानते कि यह कितनी बाकी है|

जिंदगी को हमेशा मुस्कुरा कर गुजारो, क्युकी आप नहीं जानते कि यह कितनी बाकी है|

Share:

More Like This

जब महत्त्वाकांक्षाएं ख़तम होती हैं, तब ख़ुशी शुरू होती है.

थोमस मर्टन

प्रसन्नता वो पुरस्कार है जो हमे हमारी समझ के अनुरूप सबसे सही जीवन जीने पे मिलता है .

रिचर्ड बैक

पैसे ने कभी किसी को ख़ुशी नहीं दी है, और न देगा, उसके स्वभाव में ऐसा कुछ नहीं है जिससे ख़ुशी उत्पन्न हो. ये जितना ज्यादा जिसके पास होता है वो उतना ही और इसे चाहता है .

बेंजामिन फ्रैंकलिन

प्रसन्नता हम पर ही निर्भर करती है .

अरस्तु

ख़ुशी तब मिलेगी जब आप जो सोचते हैं, जो कहते हैं और जो करते हैं, सामंजस्य में हों.

महात्मा गाँधी

यदि आपकी ख़ुशी इस बात पर निर्भर करती है कि कोई और क्या करता है तो मेरा मानना है की आपको कोई समस्या है .

रिचर्ड बैक

जब महत्त्वाकांक्षाएं ख़तम होती हैं, तब ख़ुशी शुरू होती है.

थोमस मर्टन

प्रसन्नता वो पुरस्कार है जो हमे हमारी समझ के अनुरूप सबसे सही जीवन जीने पे मिलता है .

रिचर्ड बैक

पैसे ने कभी किसी को ख़ुशी नहीं दी है, और न देगा, उसके स्वभाव में ऐसा कुछ नहीं है जिससे ख़ुशी उत्पन्न हो. ये जितना ज्यादा जिसके पास होता है वो उतना ही और इसे चाहता है .

बेंजामिन फ्रैंकलिन

प्रसन्नता हम पर ही निर्भर करती है .

अरस्तु

ख़ुशी तब मिलेगी जब आप जो सोचते हैं, जो कहते हैं और जो करते हैं, सामंजस्य में हों.

महात्मा गाँधी

यदि आपकी ख़ुशी इस बात पर निर्भर करती है कि कोई और क्या करता है तो मेरा मानना है की आपको कोई समस्या है .

रिचर्ड बैक