मेंहनत इतनी करो की किस्मत भी तुम्हारा साथ देने पर मजबूर हो जाए|

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प्रीत ना करिये पंछी जैसी जल सूखे उड़ जाए प्रीत करिये मछली जैसी जल सुखे मर जाए

भगवान से निराश कभी मत होना, संसार से आशा कभी मत करना

मत भागो किसी के पीछे जो जाता है उसे जाने दो आएगा वही वापस लौट कर खुद को जऱा कामयाब तो होने दो

इंसान का व्यक्तित्व तब ही उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है

सदैव

मनुष्य अकेला ही जन्म लेता है, अकेला ही दुःख भोगता है, अकेला ही मोक्ष का अधिकारी होता है और अकेला ही नरक जाता है. अतः रिश्ते-नाते तो क्षण भंगुर हैं, हमें अकेले ही दुनिया के मंच पर अभिनय करना पड़ता है.

प्रीत ना करिये पंछी जैसी जल सूखे उड़ जाए प्रीत करिये मछली जैसी जल सुखे मर जाए

भगवान से निराश कभी मत होना, संसार से आशा कभी मत करना

मत भागो किसी के पीछे जो जाता है उसे जाने दो आएगा वही वापस लौट कर खुद को जऱा कामयाब तो होने दो

इंसान का व्यक्तित्व तब ही उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है

सदैव

मनुष्य अकेला ही जन्म लेता है, अकेला ही दुःख भोगता है, अकेला ही मोक्ष का अधिकारी होता है और अकेला ही नरक जाता है. अतः रिश्ते-नाते तो क्षण भंगुर हैं, हमें अकेले ही दुनिया के मंच पर अभिनय करना पड़ता है.