अभी गर्दन झुकाकर पढ़ लो तुम यकीं मानो एक दिन पुरे जिले में सबसे ऊंचा सर् तुम्हारा होगा|

अभी गर्दन झुकाकर पढ़ लो तुम यकीं मानो एक दिन पुरे जिले में सबसे ऊंचा सर् तुम्हारा होगा|

Share:

More Like This

हो सके तो कभी किसी से जलना मत क्योंकि ऊपर वाला जिसे देता है उसे अपने खजाने में से देता है तुमसे छीन के नही देता

धार्मिक कथाओं को सुनने पर, श्मशान में और रोगियों को देखकर व्यक्ति कि बुद्धि को जो वैराग्य हो जाता है. यदि ऐसा वैराग्य सदा बना रहे तो भला कौन संसार के इन बंधनों से मुक्त नहीं होगा.

आमदनी कम हो तो "ख़र्चों" पर क़ाबू रखिए जानकारी कम हो तो "लफ़्ज़ों" पर क़ाबू रखिए

ज्यादातर लोग उतने ही खुश रहते हैं, जितना वो अपने दिमाग में तय कर लेते हैं।

जरूरी नही कि हम सबको पसंद आए, बस, जिंदगी एेसे जिओ कि रब को पसंद आए...???

किसी से प्रतिशोध लेने का आनंद केवल दो दिन तक रहेगा !! परन्तु उसे क्षमा कर देने का आनंद जीवन भर रहेगा !!

हो सके तो कभी किसी से जलना मत क्योंकि ऊपर वाला जिसे देता है उसे अपने खजाने में से देता है तुमसे छीन के नही देता

धार्मिक कथाओं को सुनने पर, श्मशान में और रोगियों को देखकर व्यक्ति कि बुद्धि को जो वैराग्य हो जाता है. यदि ऐसा वैराग्य सदा बना रहे तो भला कौन संसार के इन बंधनों से मुक्त नहीं होगा.

आमदनी कम हो तो "ख़र्चों" पर क़ाबू रखिए जानकारी कम हो तो "लफ़्ज़ों" पर क़ाबू रखिए

ज्यादातर लोग उतने ही खुश रहते हैं, जितना वो अपने दिमाग में तय कर लेते हैं।

जरूरी नही कि हम सबको पसंद आए, बस, जिंदगी एेसे जिओ कि रब को पसंद आए...???

किसी से प्रतिशोध लेने का आनंद केवल दो दिन तक रहेगा !! परन्तु उसे क्षमा कर देने का आनंद जीवन भर रहेगा !!