अभी गर्दन झुकाकर पढ़ लो तुम यकीं मानो एक दिन पुरे जिले में सबसे ऊंचा सर् तुम्हारा होगा|

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किसी को ज्ञान उतना ही दो जितना वो समझ सके, क्योंकि बाल्टी भरने के बाद नल ना बंद करने से पानी व्यर्थ हो जाता है

"सार्वजनिक"​ रूप से की गई "आलोचना" अपमान में बदल जाती है और .... "एकांत"​ में बताने पर ​"सलाह"​ बन जाती है...!!

मनुष्य की वाणी ही विष और अमृत की खान है।

अहंकार में डूबे इंसान को न तो खुद की गलतियां दिखाई देती है ना ही दुसरो की अच्छी बातें

पलट कर जबाव देना बेशक गलत बात है l लेकिन सुनते रहो तो लोग बोलने की हदें भूल जाते हैं ll"

ख़ुद की जिम्मेवारी और काम को सौंप बड़े गुमान से बैठा है, ख़ुदा ने जबसे माँ बनाई है खुद इत्मिनान से बैठा है।

किसी को ज्ञान उतना ही दो जितना वो समझ सके, क्योंकि बाल्टी भरने के बाद नल ना बंद करने से पानी व्यर्थ हो जाता है

"सार्वजनिक"​ रूप से की गई "आलोचना" अपमान में बदल जाती है और .... "एकांत"​ में बताने पर ​"सलाह"​ बन जाती है...!!

मनुष्य की वाणी ही विष और अमृत की खान है।

अहंकार में डूबे इंसान को न तो खुद की गलतियां दिखाई देती है ना ही दुसरो की अच्छी बातें

पलट कर जबाव देना बेशक गलत बात है l लेकिन सुनते रहो तो लोग बोलने की हदें भूल जाते हैं ll"

ख़ुद की जिम्मेवारी और काम को सौंप बड़े गुमान से बैठा है, ख़ुदा ने जबसे माँ बनाई है खुद इत्मिनान से बैठा है।