अभी गर्दन झुकाकर पढ़ लो तुम यकीं मानो एक दिन पुरे जिले में सबसे ऊंचा सर् तुम्हारा होगा|

अभी गर्दन झुकाकर पढ़ लो तुम यकीं मानो एक दिन पुरे जिले में सबसे ऊंचा सर् तुम्हारा होगा|

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तकदीर बदल जाती है जब ज़िन्दगी का कोई मकसद हो, वरना उम्र कट जाती है तकदीर को इल्जाम देते देते

जितने तुम चतुर होते जाते हो उतना ही तुम्हारा ह्रदय मरता जाता है

किसी के दर्द की बैंडेज मत बनो क्योंकि जब घाव भर जाएगा तो तुम कूड़ेदान में फेंक दिए जाओग

उस पछतावे के साथ मत जागिये जिसे आप कल पूरा नहीं कर सके, उस संकल्प के साथ जागिये जिसे आपको आज पूरा करना

संघर्ष के समय कोई नजदीक नही आता सफलता के बाद किसी को आमंत्रित नही करना पड़ता

न तो इतने कड़वे बनो की कोई थूक दे और न ही इतने मीठे बनों की कोई निगल जाए.

तकदीर बदल जाती है जब ज़िन्दगी का कोई मकसद हो, वरना उम्र कट जाती है तकदीर को इल्जाम देते देते

जितने तुम चतुर होते जाते हो उतना ही तुम्हारा ह्रदय मरता जाता है

किसी के दर्द की बैंडेज मत बनो क्योंकि जब घाव भर जाएगा तो तुम कूड़ेदान में फेंक दिए जाओग

उस पछतावे के साथ मत जागिये जिसे आप कल पूरा नहीं कर सके, उस संकल्प के साथ जागिये जिसे आपको आज पूरा करना

संघर्ष के समय कोई नजदीक नही आता सफलता के बाद किसी को आमंत्रित नही करना पड़ता

न तो इतने कड़वे बनो की कोई थूक दे और न ही इतने मीठे बनों की कोई निगल जाए.