india मैं "खानदान की इज़्ज़त" और "लोग क्या कहेंगे" किसी की जिंदगी से ज्यादा महत्वपूर्ण है...

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गुल्लक की तरह था रिश्ता हमारा जब टूटा तब कीमत समझ में आई

थक सा गया है मेरी चाहतों का वजूद, अब कोई अच्छा भी लगे तो इजहार नहीं करता.

जिनके दिल बहुत अच्छे होते हैं न अक्सर उनकी किस्मत बहुत खराब होती है

उदास कर देती है.. हर रोज ये शाम..ऐसा लगता है जैसे भूल रहा है कोई.. धीरे- धीरे..

बुरा हमें भी लगता है बस तुम्हे एहसास नहीं होने देते

गिरते हुए पत्त्तों ने मुझे यह समझाया हैं बोझ बन जाओ तो अपनो भी गिरा देते हैं .

गुल्लक की तरह था रिश्ता हमारा जब टूटा तब कीमत समझ में आई

थक सा गया है मेरी चाहतों का वजूद, अब कोई अच्छा भी लगे तो इजहार नहीं करता.

जिनके दिल बहुत अच्छे होते हैं न अक्सर उनकी किस्मत बहुत खराब होती है

उदास कर देती है.. हर रोज ये शाम..ऐसा लगता है जैसे भूल रहा है कोई.. धीरे- धीरे..

बुरा हमें भी लगता है बस तुम्हे एहसास नहीं होने देते

गिरते हुए पत्त्तों ने मुझे यह समझाया हैं बोझ बन जाओ तो अपनो भी गिरा देते हैं .