india मैं "खानदान की इज़्ज़त" और "लोग क्या कहेंगे" किसी की जिंदगी से ज्यादा महत्वपूर्ण है...

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कोई अपना सा क्या लगा एक बार, किस्मत ने तो बुरा ही मान लिया

हम नादान थे जो उसे हमसफ़र समझ बैठे जो चलती थी साथ मेरे पर तलाश उसे किसी और की थी

तेरी नाराज़गी वाजिब है दोस्त.. मैं भी खुद से खुश नहीं हूं आजकल...

हजारो मेहफिल है .. लाखो मेले है, पर जहा तुम नहीं वहा हम अकेले है

बात वफाओं की होती तो कभी न हारते, बात नीसब की थी, कुछ ना कर सके |

जिस रात की कभी कोई सुबह नही होती हर रात उस रात का इंतेज़ार रहता है.......

कोई अपना सा क्या लगा एक बार, किस्मत ने तो बुरा ही मान लिया

हम नादान थे जो उसे हमसफ़र समझ बैठे जो चलती थी साथ मेरे पर तलाश उसे किसी और की थी

तेरी नाराज़गी वाजिब है दोस्त.. मैं भी खुद से खुश नहीं हूं आजकल...

हजारो मेहफिल है .. लाखो मेले है, पर जहा तुम नहीं वहा हम अकेले है

बात वफाओं की होती तो कभी न हारते, बात नीसब की थी, कुछ ना कर सके |

जिस रात की कभी कोई सुबह नही होती हर रात उस रात का इंतेज़ार रहता है.......