काश आंसूं के साथ यादें बाह जाती .. तो एक दिन तसली के साथ बैठ कर रो लेता ...
इतिहास गवाह है- 'खबर' हो या 'कबर' खोदते हमेशा अपने ही हैं|
ज़रा सा खुश क्या होती हूँ किस्मत को बुरा लग जाता है
आंधी आती है, तो पेड़ से पत्ते टूट जाते है नया बाबू मिलते ही पुराने छूट जाते हैं
जहर में उतना जहर नहीं होगा, जितना जहर कुछ लोग दूसरों के लिए अपने अंदर रखते है
तेरी तो फितरत ही थी सभी से मोहब्बत करने की, हम तो बेवजह ही खुद को खुशनसीब समझने लगे थे.
काश आंसूं के साथ यादें बाह जाती .. तो एक दिन तसली के साथ बैठ कर रो लेता ...
इतिहास गवाह है- 'खबर' हो या 'कबर' खोदते हमेशा अपने ही हैं|
ज़रा सा खुश क्या होती हूँ किस्मत को बुरा लग जाता है
आंधी आती है, तो पेड़ से पत्ते टूट जाते है नया बाबू मिलते ही पुराने छूट जाते हैं
जहर में उतना जहर नहीं होगा, जितना जहर कुछ लोग दूसरों के लिए अपने अंदर रखते है
तेरी तो फितरत ही थी सभी से मोहब्बत करने की, हम तो बेवजह ही खुद को खुशनसीब समझने लगे थे.