फर्क सिर्फ सोच का है... वरना जो सीढ़ियां ऊपर ले जाती है वही नीचे भी ले आती है|

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सफलता पहले से की गई तैयारी पर निर्भर है और बिना तैयारी के असफलता निश्चित है

अगर इंसान सच्चा होगा तो सब कुछ अच्छा होगा

रख हौसला वो मन्ज़र भी आएगा, प्यासे के पास चल के समंदर भी आयेगा,

जींदगी वन-डे मैच की तरह है जिसमें रन तो बढ़ रहे है पर ओवर घट रहे है मतलब धन तो बढ़ रहा है पर उम्र घट रही है इसलिए हर दिन कुछ न कुछ पूण्य के चौके छक्के लगायें... ताकि ऊपर बैठा एम्पायर हमें खुशियों की ट्रॉफी दे

एक इच्छा तुम्हे मंजिल तक पंहुचा देगी... लेकिन अनेक इछाइए तुम्हे मंजिल से भटका देग

अच्छे जरूर बने लेकिन साबित करने की कोशिश ना करें...

सफलता पहले से की गई तैयारी पर निर्भर है और बिना तैयारी के असफलता निश्चित है

अगर इंसान सच्चा होगा तो सब कुछ अच्छा होगा

रख हौसला वो मन्ज़र भी आएगा, प्यासे के पास चल के समंदर भी आयेगा,

जींदगी वन-डे मैच की तरह है जिसमें रन तो बढ़ रहे है पर ओवर घट रहे है मतलब धन तो बढ़ रहा है पर उम्र घट रही है इसलिए हर दिन कुछ न कुछ पूण्य के चौके छक्के लगायें... ताकि ऊपर बैठा एम्पायर हमें खुशियों की ट्रॉफी दे

एक इच्छा तुम्हे मंजिल तक पंहुचा देगी... लेकिन अनेक इछाइए तुम्हे मंजिल से भटका देग

अच्छे जरूर बने लेकिन साबित करने की कोशिश ना करें...