बोलने का हक़्क़ छीना जा सकता है, मगर ख़ामोशी का कभी नहीं....

बोलने का हक़्क़ छीना जा सकता है, मगर ख़ामोशी का कभी नहीं....

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सिर्फ तूने ही कभी मुझको अपना न समझा, जमाना तो आज भी मुझे तेरा दीवाना कहता है

किसी ने क्या खूब कहा है - अकड़ तो सब में होती है .. झुकता वही है जिसे रिश्तो की फ़िक्र होती है..

उदास कर देती है.. हर रोज ये शाम..ऐसा लगता है जैसे भूल रहा है कोई.. धीरे- धीरे..

मेरी याद क़यामत की तरह है एक दिन ज़रूर आएगी

मेरी किस्मत में तो कुछ यूँ लिखा है, किसी ने वक्त गुज़ारने के लिए अपना बनाया, तो किसी ने अपना बनाकर वक्त गुजार लिया

दिल के रिश्ते कभी नहीं टूटते.. बस खामोश हो जाते है..

सिर्फ तूने ही कभी मुझको अपना न समझा, जमाना तो आज भी मुझे तेरा दीवाना कहता है

किसी ने क्या खूब कहा है - अकड़ तो सब में होती है .. झुकता वही है जिसे रिश्तो की फ़िक्र होती है..

उदास कर देती है.. हर रोज ये शाम..ऐसा लगता है जैसे भूल रहा है कोई.. धीरे- धीरे..

मेरी याद क़यामत की तरह है एक दिन ज़रूर आएगी

मेरी किस्मत में तो कुछ यूँ लिखा है, किसी ने वक्त गुज़ारने के लिए अपना बनाया, तो किसी ने अपना बनाकर वक्त गुजार लिया

दिल के रिश्ते कभी नहीं टूटते.. बस खामोश हो जाते है..