बोलने का हक़्क़ छीना जा सकता है, मगर ख़ामोशी का कभी नहीं....

बोलने का हक़्क़ छीना जा सकता है, मगर ख़ामोशी का कभी नहीं....

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ये मोहब्बत के हादसे दिलो को तोड़ देते है, तुम मज़िल की बात करते हो लोग राहों मे छोड़ देते है

दुआ हैं हर किसी को कोई ऐसा मिले जो उसे कभी रोने ना दे

दर्द सहने की कुछ यु आदत सी हो गई है.... की अब दर्द न मिले तो दर्द सा होता है

"कभी फुर्सत मिले तो सोचना जरूर एक लापरवाह लड़का क्यों तेरी परवाह करता था."

मेरी याद क़यामत की तरह है एक दिन ज़रूर आएगी

बुरा लगता है हर बार किसी को अपनी याद दिलाना जिन में वफ़ा होती है खुद ही याद कर लेते हैं

ये मोहब्बत के हादसे दिलो को तोड़ देते है, तुम मज़िल की बात करते हो लोग राहों मे छोड़ देते है

दुआ हैं हर किसी को कोई ऐसा मिले जो उसे कभी रोने ना दे

दर्द सहने की कुछ यु आदत सी हो गई है.... की अब दर्द न मिले तो दर्द सा होता है

"कभी फुर्सत मिले तो सोचना जरूर एक लापरवाह लड़का क्यों तेरी परवाह करता था."

मेरी याद क़यामत की तरह है एक दिन ज़रूर आएगी

बुरा लगता है हर बार किसी को अपनी याद दिलाना जिन में वफ़ा होती है खुद ही याद कर लेते हैं