ऐसा नही है कि मुझमे कोई ‘ऐब’ नही है.. पर सच कहता हूँ मुझमें ‘फरेब’ नहीं है
भर्री महफ़िल में दोस्ती का ज़िकर हुआ, हमने तो सिर्फ आपकी और देखा और लोग वाह वाह कहने लगे
इतना प्यार तो मैंने खुद से भी नहीं किया, जितना तुमसे हो गया है |
काश मोहब्बत में भी चुनाव होते, गजब का भाषण देते तुम्हें पाने के लिए.
तेरे चेहरे में ऐसा क्या है आखिर, जिसे बरसों से देखा जा रहा है
तुम मेरी वो किताब हो, जिसका हर लफ्ज़ मुझे ज़बानी याद है
ऐसा नही है कि मुझमे कोई ‘ऐब’ नही है.. पर सच कहता हूँ मुझमें ‘फरेब’ नहीं है
भर्री महफ़िल में दोस्ती का ज़िकर हुआ, हमने तो सिर्फ आपकी और देखा और लोग वाह वाह कहने लगे
इतना प्यार तो मैंने खुद से भी नहीं किया, जितना तुमसे हो गया है |
काश मोहब्बत में भी चुनाव होते, गजब का भाषण देते तुम्हें पाने के लिए.
तेरे चेहरे में ऐसा क्या है आखिर, जिसे बरसों से देखा जा रहा है
तुम मेरी वो किताब हो, जिसका हर लफ्ज़ मुझे ज़बानी याद है