वहम था कि सारा बाग़ अपना है, तूफ़ान के बाद पता चला कि सूखे पत्तो पर भी हक़ हवाओ का था...

वहम था कि सारा बाग़ अपना है, तूफ़ान के बाद पता चला कि सूखे पत्तो पर भी हक़ हवाओ का था...

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कुछ पन्ने क्या फटे ज़िन्दगी की किताब के, ज़माने ने समझा हमारा दौर ही ख़त्म हो गया.

तकलीफें तो हज़ारों हैं इस ज़माने में, बस कोई अपना नज़र अंदाज़ करे तो बर्दाश्त नहीं होता.

नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है।

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है।

मुझे गरुर था उसकी मोह्ब्बत पर, वो अपनी शोहरत मे हमे भूल गया.

रात भर जलता रहा यह दिल उसी की याद में.. समझ नही आता दर्द प्यार करने से होता है या याद करने से

कुछ पन्ने क्या फटे ज़िन्दगी की किताब के, ज़माने ने समझा हमारा दौर ही ख़त्म हो गया.

तकलीफें तो हज़ारों हैं इस ज़माने में, बस कोई अपना नज़र अंदाज़ करे तो बर्दाश्त नहीं होता.

नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है।

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है।

मुझे गरुर था उसकी मोह्ब्बत पर, वो अपनी शोहरत मे हमे भूल गया.

रात भर जलता रहा यह दिल उसी की याद में.. समझ नही आता दर्द प्यार करने से होता है या याद करने से