दिल से खेलना हमें भी आता है, पर जिस खेल में खिलौना टूट जाए हमें वो खेल पसंद नहीं
कल का दिन किसने देखा है, आज का दिन भी खोये क्यों? जिन घड़ियों में हँस सकते है, उन घड़ियों में रोये क्यों…
एक ही शख्स से मतलब था वो भी मतलबी निकला
तेरी नफ़रत ने ये क्या सिला दिया मुझे.. ज़हर गम-इ-जुदाई का पिला दिया मुझे….
जिस “चाँद” के हजारों हो चाहने वाले… दोस्त, वो क्या समझेगा एक सितारे कि कमी को….!!
बोहुत भीड़ है मोहब्बत के इस शेहेर में, एक बार जो बिछड़ा वापस नहीं मिलता
दिल से खेलना हमें भी आता है, पर जिस खेल में खिलौना टूट जाए हमें वो खेल पसंद नहीं
कल का दिन किसने देखा है, आज का दिन भी खोये क्यों? जिन घड़ियों में हँस सकते है, उन घड़ियों में रोये क्यों…
एक ही शख्स से मतलब था वो भी मतलबी निकला
तेरी नफ़रत ने ये क्या सिला दिया मुझे.. ज़हर गम-इ-जुदाई का पिला दिया मुझे….
जिस “चाँद” के हजारों हो चाहने वाले… दोस्त, वो क्या समझेगा एक सितारे कि कमी को….!!
बोहुत भीड़ है मोहब्बत के इस शेहेर में, एक बार जो बिछड़ा वापस नहीं मिलता