उपर वाला भी अपना आशिक है, इसिलीऐ तो किसिका होने नहि देता
कल का दिन किसने देखा है, आज का दिन भी खोये क्यों? जिन घड़ियों में हँस सकते है, उन घड़ियों में रोये क्यों…
जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की, जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई।
जार सी ज़िन्दगी है अरमान बहुत है, हमदर्द कोई नहीं यह, इंसान बहुत है, दिल का दर्द सुनाएं तो सुनाये किसको, जो दिल के करीब है वो अनजान बहुत है.
जो हैरान है मेरे सब्र पर उनसे कह दो. जो आँसू जमीं पर नहीं गिरते दिल चीर जाते हैं।
बहुत ज्यादा हॅसने और खुश नज़र आने वाले लोग…. अंदर से टूटे होते है
उपर वाला भी अपना आशिक है, इसिलीऐ तो किसिका होने नहि देता
कल का दिन किसने देखा है, आज का दिन भी खोये क्यों? जिन घड़ियों में हँस सकते है, उन घड़ियों में रोये क्यों…
जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की, जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई।
जार सी ज़िन्दगी है अरमान बहुत है, हमदर्द कोई नहीं यह, इंसान बहुत है, दिल का दर्द सुनाएं तो सुनाये किसको, जो दिल के करीब है वो अनजान बहुत है.
जो हैरान है मेरे सब्र पर उनसे कह दो. जो आँसू जमीं पर नहीं गिरते दिल चीर जाते हैं।
बहुत ज्यादा हॅसने और खुश नज़र आने वाले लोग…. अंदर से टूटे होते है