रुकते तोह सफर रह जाता, चलते तोह हमसफ़र रह जाता
दुश्मनो से मोहब्बत होने लगी मुझको, जैसे जैसे अपनों को आज़माते चले गए
कल का दिन किसने देखा है, आज का दिन भी खोये क्यों? जिन घड़ियों में हँस सकते है, उन घड़ियों में रोये क्यों…
यु ही हम दिल साफ़ रखते थे, पता नहीं था क कीमत चेहरे की थी
जीवन बहुत छोटा है, अगर हम रोते हैं!
अभी से क्यों छलक आये तुम्हारी आँख में आँसू, अभी छेड़ी कहाँ है दास्तान-ए-ज़िंदगी मैंने।
रुकते तोह सफर रह जाता, चलते तोह हमसफ़र रह जाता
दुश्मनो से मोहब्बत होने लगी मुझको, जैसे जैसे अपनों को आज़माते चले गए
कल का दिन किसने देखा है, आज का दिन भी खोये क्यों? जिन घड़ियों में हँस सकते है, उन घड़ियों में रोये क्यों…
यु ही हम दिल साफ़ रखते थे, पता नहीं था क कीमत चेहरे की थी
जीवन बहुत छोटा है, अगर हम रोते हैं!
अभी से क्यों छलक आये तुम्हारी आँख में आँसू, अभी छेड़ी कहाँ है दास्तान-ए-ज़िंदगी मैंने।