"सबसे बड़ी हक़ीक़त" लोग आपके बारे मैं अच्छा सुनने पर शक करते है, लेकिन बुरा सुनने पर तुरंत यकींन कर लेते है...

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बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी। अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है।

दो चार आँसू ही आते हैं पलकों के किनारे पे, वर्ना आँखों का समंदर गहरा बहुत है।

तू इश्क की दूसरी निशानी दे दे मुझको, आँसू तो रोज गिर कर सूख जाते हैं।

टपक पड़ते हैं आँसू जब तुम्हारी याद आती है, ये वो बरसात है जिसका कोई मौसम नहीं होता।

आँसू की कीमत वो क्या जाने, जो हर बात पे आँसू बहाते है, इसकी कीमत तो उनसे पूँछो, जो गम में भी मुस्कुराते है…

सपने वो होते है जो सोने नहीं देते, और अपने वो होते है जो रोने नहीं देते…

बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी। अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है।

दो चार आँसू ही आते हैं पलकों के किनारे पे, वर्ना आँखों का समंदर गहरा बहुत है।

तू इश्क की दूसरी निशानी दे दे मुझको, आँसू तो रोज गिर कर सूख जाते हैं।

टपक पड़ते हैं आँसू जब तुम्हारी याद आती है, ये वो बरसात है जिसका कोई मौसम नहीं होता।

आँसू की कीमत वो क्या जाने, जो हर बात पे आँसू बहाते है, इसकी कीमत तो उनसे पूँछो, जो गम में भी मुस्कुराते है…

सपने वो होते है जो सोने नहीं देते, और अपने वो होते है जो रोने नहीं देते…