"सबसे बड़ी हक़ीक़त" लोग आपके बारे मैं अच्छा सुनने पर शक करते है, लेकिन बुरा सुनने पर तुरंत यकींन कर लेते है...

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बेखबर बेवजह बेरुखी ना किया कर कोई टूट जाता है तेरा लहजा बदलने से ।

तेरी नफ़रत ने ये क्या सिला दिया मुझे.. ज़हर गम-इ-जुदाई का पिला दिया मुझे….

बोहुत भीड़ है मोहब्बत के इस शेहेर में, एक बार जो बिछड़ा वापस नहीं मिलता

बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी। अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है।

ना जाने आखिर इन आँसूओ पे क्या गुजरी, जो दिल से आँख तक आये मगर बह ना सके।

दो चार आँसू ही आते हैं पलकों के किनारे पे, वर्ना आँखों का समंदर गहरा बहुत है।

बेखबर बेवजह बेरुखी ना किया कर कोई टूट जाता है तेरा लहजा बदलने से ।

तेरी नफ़रत ने ये क्या सिला दिया मुझे.. ज़हर गम-इ-जुदाई का पिला दिया मुझे….

बोहुत भीड़ है मोहब्बत के इस शेहेर में, एक बार जो बिछड़ा वापस नहीं मिलता

बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी। अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है।

ना जाने आखिर इन आँसूओ पे क्या गुजरी, जो दिल से आँख तक आये मगर बह ना सके।

दो चार आँसू ही आते हैं पलकों के किनारे पे, वर्ना आँखों का समंदर गहरा बहुत है।