अगर खुद का मूल्य पता लग जाए, तो दूसरों द्वारा की गई अनावश्यक निंदा, तुम्हे छू भी नही सकती..
कुछ पाने के लिए कुछ करना पड़ता है
जहा बदलना जरूरी हो जाता है, वहां बदलना सीखिए
सबसे बड़ी रिस्क तब रहती है जब हमें पता नही रहता कि हम क्या कर रहे है
माँ बाप के साथ आपका सुलूक। वो कहानी है..... जिसे आप लिखते हैं.. .... और आपकी संतान आपको पढ़कर सुनाती है...।
यदि आप सच कहते हैं, तो आपको कुछ याद रखने की जरूरत नहीं रहती
अगर खुद का मूल्य पता लग जाए, तो दूसरों द्वारा की गई अनावश्यक निंदा, तुम्हे छू भी नही सकती..
कुछ पाने के लिए कुछ करना पड़ता है
जहा बदलना जरूरी हो जाता है, वहां बदलना सीखिए
सबसे बड़ी रिस्क तब रहती है जब हमें पता नही रहता कि हम क्या कर रहे है
माँ बाप के साथ आपका सुलूक। वो कहानी है..... जिसे आप लिखते हैं.. .... और आपकी संतान आपको पढ़कर सुनाती है...।
यदि आप सच कहते हैं, तो आपको कुछ याद रखने की जरूरत नहीं रहती