माँ बाप के साथ आपका सुलूक। वो कहानी है..... जिसे आप लिखते हैं.. .... और आपकी संतान आपको पढ़कर सुनाती है...।
लम्बा सफ़र तय करना है तो...ठोकरों से मुलाकात लाज़मी है...!!
अत्यधिक उम्मीद को विराम दो, मन की शांति फिर से वापिस लौट आएगी
महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है
ऊँचा उठने के लिए पंखों की जरुरत केवल पक्षियों को ही पड़ती है.. मनुष्य तो जितना विनम्रता से झुकता है उतना ही ऊपर उठता है।।
“शिक्षक” और “सड़क” दोनों एक जैसे होते हैं खुद जहाँ है वहीं पर रहते हैं मगर दुसरो को उनकी मंजिल तक पहुंचा हीं देते हैं !
माँ बाप के साथ आपका सुलूक। वो कहानी है..... जिसे आप लिखते हैं.. .... और आपकी संतान आपको पढ़कर सुनाती है...।
लम्बा सफ़र तय करना है तो...ठोकरों से मुलाकात लाज़मी है...!!
अत्यधिक उम्मीद को विराम दो, मन की शांति फिर से वापिस लौट आएगी
महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है
ऊँचा उठने के लिए पंखों की जरुरत केवल पक्षियों को ही पड़ती है.. मनुष्य तो जितना विनम्रता से झुकता है उतना ही ऊपर उठता है।।
“शिक्षक” और “सड़क” दोनों एक जैसे होते हैं खुद जहाँ है वहीं पर रहते हैं मगर दुसरो को उनकी मंजिल तक पहुंचा हीं देते हैं !