जैसा आप सोचते है वैसा आप बन जायेंगे|

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यदि तुम्हारा पड़ोसी भूखा है तो मंदिर में प्रसाद चढ़ाना पाप है

आपका बीता हुआ कल "कोई गलती नही होगी" अगर आप उससे कुछ सीखते है तो

मनुष्य अकेला ही जन्म लेता है, अकेला ही दुःख भोगता है, अकेला ही मोक्ष का अधिकारी होता है और अकेला ही नरक जाता है. अतः रिश्ते-नाते तो क्षण भंगुर हैं, हमें अकेले ही दुनिया के मंच पर अभिनय करना पड़ता है.

सफल होने के बाद भी आप खुद को उस व्यक्ति से बड़ा ना समझे जिसके हाथों को पकड़ कर आपने सफलता की सीढ़ी चढ़ी

जिंदगी को सफल बनाने के लिए बातों से नहीं रातों से लड़ना पड़ता है

जीत की आदत अच्छी है, मगर कुछ रिश्तों में हार जाना बेहतर है

यदि तुम्हारा पड़ोसी भूखा है तो मंदिर में प्रसाद चढ़ाना पाप है

आपका बीता हुआ कल "कोई गलती नही होगी" अगर आप उससे कुछ सीखते है तो

मनुष्य अकेला ही जन्म लेता है, अकेला ही दुःख भोगता है, अकेला ही मोक्ष का अधिकारी होता है और अकेला ही नरक जाता है. अतः रिश्ते-नाते तो क्षण भंगुर हैं, हमें अकेले ही दुनिया के मंच पर अभिनय करना पड़ता है.

सफल होने के बाद भी आप खुद को उस व्यक्ति से बड़ा ना समझे जिसके हाथों को पकड़ कर आपने सफलता की सीढ़ी चढ़ी

जिंदगी को सफल बनाने के लिए बातों से नहीं रातों से लड़ना पड़ता है

जीत की आदत अच्छी है, मगर कुछ रिश्तों में हार जाना बेहतर है