"बहुत मुश्किल नहीं हैं, ज़िंदगी की सच्चाई समझना, "जिस तराज़ू ⚖पर दूसरों को तौलते हैं, उस पर कभी ख़ुद बैठ के देखिये।
वजूद सबका अपना अपना है सूर्य के सामने दीपक का ना सही अंधेरे के आगे बहुत कुछ है
चीजें खुद नहीं होतीं, उन्हें करना पड़ता है
मुमकिन नहीं.., हर "वक्त" मेहरबां रहे जिंदगी! कुछ "लम्हें" .. जीने का तजुर्बा भी सिखाते है.
समझदार वही है जो फूँक-फूँक कर कदम रखे, पानी को छानकर पिए, शास्त्रानुसार वाक्य बोले और सोच-विचार कर कर्म करे. इस तरह किए गए कार्य में सफलता अवश्य मिलती है .
"हर इंसान में कुछ न कुछ प्रतिभा होती है लेकिन अक्सर लोग इसे दूसरों के जैसा बनने में नष्ट कर देते हैं"
"बहुत मुश्किल नहीं हैं, ज़िंदगी की सच्चाई समझना, "जिस तराज़ू ⚖पर दूसरों को तौलते हैं, उस पर कभी ख़ुद बैठ के देखिये।
वजूद सबका अपना अपना है सूर्य के सामने दीपक का ना सही अंधेरे के आगे बहुत कुछ है
चीजें खुद नहीं होतीं, उन्हें करना पड़ता है
मुमकिन नहीं.., हर "वक्त" मेहरबां रहे जिंदगी! कुछ "लम्हें" .. जीने का तजुर्बा भी सिखाते है.
समझदार वही है जो फूँक-फूँक कर कदम रखे, पानी को छानकर पिए, शास्त्रानुसार वाक्य बोले और सोच-विचार कर कर्म करे. इस तरह किए गए कार्य में सफलता अवश्य मिलती है .
"हर इंसान में कुछ न कुछ प्रतिभा होती है लेकिन अक्सर लोग इसे दूसरों के जैसा बनने में नष्ट कर देते हैं"