पत्तों सी होती है कई रिश्तों की उम्र...! आज हरे...........कल सूखे क्यों न हम जड़ों से रिश्ते निभाना सीखें...
बड़ा सोचो, जल्दी सोअचो, आगे सोचो . विचारों पर किसी का एकाधिकार नहीं है
इंसान वो लड़ाई कभी नहीं जीत सकता जिसमें दुश्मन उसके अपने हो
दुसरो को समझना बेशक बुद्धिमानी हो सकती है मगर खुद को समझना ही ज़िन्दगी का असली ज्ञान है
आपकी नाजायज कमाई का लाभ कोई भी उठा सकता है पर आपके नाजायज कर्मो का फल आपको खुद ही भुगतना पड़ता है...
जिंदगी के हर मोड़ पर हमे वही करना चाहिये..... जो हमारा दिल हमसे कहे, क्योंकि जो दिमाग कहता है वो "मज़बूरी" होती है, और जो दिल कहता है वो "मंजूरी" होती है...
पत्तों सी होती है कई रिश्तों की उम्र...! आज हरे...........कल सूखे क्यों न हम जड़ों से रिश्ते निभाना सीखें...
बड़ा सोचो, जल्दी सोअचो, आगे सोचो . विचारों पर किसी का एकाधिकार नहीं है
इंसान वो लड़ाई कभी नहीं जीत सकता जिसमें दुश्मन उसके अपने हो
दुसरो को समझना बेशक बुद्धिमानी हो सकती है मगर खुद को समझना ही ज़िन्दगी का असली ज्ञान है
आपकी नाजायज कमाई का लाभ कोई भी उठा सकता है पर आपके नाजायज कर्मो का फल आपको खुद ही भुगतना पड़ता है...
जिंदगी के हर मोड़ पर हमे वही करना चाहिये..... जो हमारा दिल हमसे कहे, क्योंकि जो दिमाग कहता है वो "मज़बूरी" होती है, और जो दिल कहता है वो "मंजूरी" होती है...