जिनके उपर जिम्मेदारियों का बोझ होता है उनको रुठने और टूटने का हक़्क़ नहीं होता..

जिनके उपर जिम्मेदारियों का बोझ होता है उनको रुठने और टूटने का हक़्क़ नहीं होता..

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ये सोच है हम इसांनो की कि एक अकेला क्या कर सकता है पर देख जरा उस सूरज को वो अकेला ही तो चमकता है।

जब अपने ही परिंदे किसी और के दाने के आदी हो जाए तो उन्हें आजाद कर देना चाहिए

“अहंकार” और “संस्कार” में फ़र्क़ है… “अहंकार” दूसरों को झुकाकर खुश होता है, “संस्कार” स्वयं झुककर खुश होता है..!

जिस रिश्ते में हमारी अहमियत खत्म हो चुकी हो, उसे चुप चाप छोड़ देना ही बेहतर है

सबसे बेहतरीन नजऱ वो है, जो अपनी कमियों को देख सके।

भोजन महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है कार्य व उसके प्रति निष्ठा. पेट तो जानवर भी भर लेते हैं. अतः मानव बनो.

ये सोच है हम इसांनो की कि एक अकेला क्या कर सकता है पर देख जरा उस सूरज को वो अकेला ही तो चमकता है।

जब अपने ही परिंदे किसी और के दाने के आदी हो जाए तो उन्हें आजाद कर देना चाहिए

“अहंकार” और “संस्कार” में फ़र्क़ है… “अहंकार” दूसरों को झुकाकर खुश होता है, “संस्कार” स्वयं झुककर खुश होता है..!

जिस रिश्ते में हमारी अहमियत खत्म हो चुकी हो, उसे चुप चाप छोड़ देना ही बेहतर है

सबसे बेहतरीन नजऱ वो है, जो अपनी कमियों को देख सके।

भोजन महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है कार्य व उसके प्रति निष्ठा. पेट तो जानवर भी भर लेते हैं. अतः मानव बनो.