दिल लगाने से अच्छा है, पेड़ लगाऐ, वोह घाव नही कम से कम छाव तोह देगे
महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है
एक ही समानता है पतंग और जिन्दगी में... ऊँचाई में हो तब तक ही वाह वाह होती हैं...!!!
सत्य भी यदि अनुचित है तो उसे नहीं कहना चाहिए।
ज्यादातर लोग उतने ही खुश रहते हैं जितना वो अपने दिमाग में तय कर लेते हैं
अभिमान नहीं होना चाहिए कि मुझे किसी की जरूरत नहीं पड़ेगी, और यह वहम भी नहीं होना चाहिए कि सबको मेरी जरूरत पड़ेगी......!!
दिल लगाने से अच्छा है, पेड़ लगाऐ, वोह घाव नही कम से कम छाव तोह देगे
महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है
एक ही समानता है पतंग और जिन्दगी में... ऊँचाई में हो तब तक ही वाह वाह होती हैं...!!!
सत्य भी यदि अनुचित है तो उसे नहीं कहना चाहिए।
ज्यादातर लोग उतने ही खुश रहते हैं जितना वो अपने दिमाग में तय कर लेते हैं
अभिमान नहीं होना चाहिए कि मुझे किसी की जरूरत नहीं पड़ेगी, और यह वहम भी नहीं होना चाहिए कि सबको मेरी जरूरत पड़ेगी......!!