एक ऐसा लक्ष्य भी होना चाहिए जो सुबह उठने पर मजबूर कर दे.
. जितना ज्यादा दूर से देखोगे लोग उतने ज्यादा अच्छे लगेंगे
तब तक मेहनत करते रहो जब तक आपको अपना परिचय खुद किसी को देने की जरूरत ना पड़े
जो ना मिले उसकी ही चाहत होती है, जो मिल जाये उसकी कदर कहाँ होती है
दोषहीन कार्यों का होना दुर्लभ होता है।
सुख का ताला केवल और केवल संतुष्टि की चाभी से खुलता है
एक ऐसा लक्ष्य भी होना चाहिए जो सुबह उठने पर मजबूर कर दे.
. जितना ज्यादा दूर से देखोगे लोग उतने ज्यादा अच्छे लगेंगे
तब तक मेहनत करते रहो जब तक आपको अपना परिचय खुद किसी को देने की जरूरत ना पड़े
जो ना मिले उसकी ही चाहत होती है, जो मिल जाये उसकी कदर कहाँ होती है
दोषहीन कार्यों का होना दुर्लभ होता है।
सुख का ताला केवल और केवल संतुष्टि की चाभी से खुलता है