"व्यक्ति को मारा जा सकता है किन्तु विचारों को नहीं"
समय का ध्यान नहीं रखने वाला व्यक्ति अपने जीवन में निर्विघ्न नहीं रहता।
उस मनुष्य की ताकत का कोई मुकाबला नही कर सकता जिसके पास सब्र की ताकत है
"बदलना" ख़राब नहीं हैं , ख़राब हैं बदल कर , पहले से "बदतर" हो जाना
आप चाहे कितना भी भलाई का काम कर लो, मगर, उस भलाई की उम्र सिर्फ अगली गलती होने तक ही है
हमारी हार इसमें नहीं है की कोई दूसरा हमे नहीं पहचानता, हार इसमें है की हम खुद अपने आप को नहीं पहचान पाते
"व्यक्ति को मारा जा सकता है किन्तु विचारों को नहीं"
समय का ध्यान नहीं रखने वाला व्यक्ति अपने जीवन में निर्विघ्न नहीं रहता।
उस मनुष्य की ताकत का कोई मुकाबला नही कर सकता जिसके पास सब्र की ताकत है
"बदलना" ख़राब नहीं हैं , ख़राब हैं बदल कर , पहले से "बदतर" हो जाना
आप चाहे कितना भी भलाई का काम कर लो, मगर, उस भलाई की उम्र सिर्फ अगली गलती होने तक ही है
हमारी हार इसमें नहीं है की कोई दूसरा हमे नहीं पहचानता, हार इसमें है की हम खुद अपने आप को नहीं पहचान पाते