जिनके उपर जिम्मेदारियों का बोझ होता है उनको रुठने और टूटने का हक़्क़ नहीं होता..

जिनके उपर जिम्मेदारियों का बोझ होता है उनको रुठने और टूटने का हक़्क़ नहीं होता..

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खुद को भी कभी महसूस कर लिया करो, कुछ रौनकें खुद से भी हुआ करती हैं!

पतझड़ में सिर्फ पत्ते गिरते हैं, नज़रों से गिरने का कोई मौसम नहीं होता

प्रत्येक अवसर के लिए तैयार रहना ही सफलता है

बुढ़ापे में आपको रोटी आपकी औलाद नहीं आपके दिए संस्कार खिलाएंगे

अत्यधिक उम्मीद को विराम दो, मन की शांति फिर से वापिस लौट आएगी

सुख दुख तो अतिथि है, बारी बारी से आएंगे, चले जाएंगे यदि वह नहीं आएंगे तो, हम अनुभव कहां से लाएंगे

खुद को भी कभी महसूस कर लिया करो, कुछ रौनकें खुद से भी हुआ करती हैं!

पतझड़ में सिर्फ पत्ते गिरते हैं, नज़रों से गिरने का कोई मौसम नहीं होता

प्रत्येक अवसर के लिए तैयार रहना ही सफलता है

बुढ़ापे में आपको रोटी आपकी औलाद नहीं आपके दिए संस्कार खिलाएंगे

अत्यधिक उम्मीद को विराम दो, मन की शांति फिर से वापिस लौट आएगी

सुख दुख तो अतिथि है, बारी बारी से आएंगे, चले जाएंगे यदि वह नहीं आएंगे तो, हम अनुभव कहां से लाएंगे