तलवार के घाव हमेशा मिट जाते है लेकिन बातों के घाव हमेशा याद रहते है....

तलवार के घाव हमेशा मिट जाते है लेकिन बातों के घाव हमेशा याद रहते है....

Share:

More Like This

कभी टूट कर बिखरो तो मेरे पास आ जाना, मुझे अपने जैसे लोग बहुत पसंद हैं

रिश्ते उन्ही से बनाओ जो निभाने की औकात रखते हो, बाकी हरेक दिल काबिल-ऐ-वफा नही होता।

वो कहती है की बहुत मजबूरियां है मेरी, साफ़ शब्दों में खुद को “बेवफ़ा” नहीं कहती.

हम न पा सके तुझे मुद्दतो से चाहने के बाद, और किसी ने अपना बना लिया तुझे चंद रसमें निभाने क बाद.

धोखा देती है शरीफ चेहरों की चमक अक्सर, हर कांच का टूकड़ा हीरा नहीं होता.

ये तो ज़मीन की फितरत है की, वो हर चीज़ को मिटा देती हे वरना, तेरी याद में गिरने वाले आंसुओं का, अलग समंदर होता।

कभी टूट कर बिखरो तो मेरे पास आ जाना, मुझे अपने जैसे लोग बहुत पसंद हैं

रिश्ते उन्ही से बनाओ जो निभाने की औकात रखते हो, बाकी हरेक दिल काबिल-ऐ-वफा नही होता।

वो कहती है की बहुत मजबूरियां है मेरी, साफ़ शब्दों में खुद को “बेवफ़ा” नहीं कहती.

हम न पा सके तुझे मुद्दतो से चाहने के बाद, और किसी ने अपना बना लिया तुझे चंद रसमें निभाने क बाद.

धोखा देती है शरीफ चेहरों की चमक अक्सर, हर कांच का टूकड़ा हीरा नहीं होता.

ये तो ज़मीन की फितरत है की, वो हर चीज़ को मिटा देती हे वरना, तेरी याद में गिरने वाले आंसुओं का, अलग समंदर होता।