तलवार के घाव हमेशा मिट जाते है लेकिन बातों के घाव हमेशा याद रहते है....

तलवार के घाव हमेशा मिट जाते है लेकिन बातों के घाव हमेशा याद रहते है....

Share:

More Like This

हमने तुम्हें उस दिन से और ज़्यादा चाहा है, जबसे मालूम हुआ के तुम हमारे होना नही चाहते.

सुना है काफी पढ़ लिख गए हो तुम, कभी वो बी पढ़ो जो हम कह नहीं पाते.

मुझे मार ही न डाले इन बादलों की साज़िश, ये जब से बरस रहे हैं तुम याद आ रहे हो.

दिल मेरा उसने ये कहकर वापस कर दिया… दुसरा दिजीए… ये तो टुटा हुआ है….!!?!!

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है।

वो बोलते रहे हम सुनते रहे, जवाब आँखों में था वो जुबान में ढूंढते रहे.

हमने तुम्हें उस दिन से और ज़्यादा चाहा है, जबसे मालूम हुआ के तुम हमारे होना नही चाहते.

सुना है काफी पढ़ लिख गए हो तुम, कभी वो बी पढ़ो जो हम कह नहीं पाते.

मुझे मार ही न डाले इन बादलों की साज़िश, ये जब से बरस रहे हैं तुम याद आ रहे हो.

दिल मेरा उसने ये कहकर वापस कर दिया… दुसरा दिजीए… ये तो टुटा हुआ है….!!?!!

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है।

वो बोलते रहे हम सुनते रहे, जवाब आँखों में था वो जुबान में ढूंढते रहे.