बुढ़ापे में आपको रोटी आपकी औलाद नहीं आपके दिए संस्कार खिलाएंगे
अपनी छवि का ध्यान रखे, क्योंकि इसकी आयु आपकी आयु से कही ज्यादा होती है
इंसान का व्यक्तित्व तभी उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है...
मनुष्य जैसे लोगों के बीच उठता-बैठता है, जैसो की सेवा करता है तथा जैसा बनने की कमाना करता है, वैसा ही बन जाता है।
अगर आप अपना पैसा गिन सकते हो तो आपको निश्चय ही और ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है
तनाव से केवल समस्याएं जन्म ले सकती है समाधान खोंजने है तो मुस्कुराना ही पड़ेगा
बुढ़ापे में आपको रोटी आपकी औलाद नहीं आपके दिए संस्कार खिलाएंगे
अपनी छवि का ध्यान रखे, क्योंकि इसकी आयु आपकी आयु से कही ज्यादा होती है
इंसान का व्यक्तित्व तभी उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है...
मनुष्य जैसे लोगों के बीच उठता-बैठता है, जैसो की सेवा करता है तथा जैसा बनने की कमाना करता है, वैसा ही बन जाता है।
अगर आप अपना पैसा गिन सकते हो तो आपको निश्चय ही और ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है
तनाव से केवल समस्याएं जन्म ले सकती है समाधान खोंजने है तो मुस्कुराना ही पड़ेगा