समय का ध्यान नहीं रखने वाला व्यक्ति अपने जीवन में निर्विघ्न नहीं रहता।
इंसान के अंदर ही समा जाए, वो स्वाभिमान होता है... और जो बाहर छलक जाए वो अभिमान होता है...
महक गुलाब की आएगी तुम्हारे हाँथों से, किसी के रास्ते से
कामयाब होने के लिए कई बार हमें जो है उसी में शुरुआत कर लेनी होती है, भले तैयारी पूरी ना हो क्योंकि यह इंतजार करने से काफी बेहतर है।
शब्द यात्रा करते हैं इसलिए पीठ पीछे भी, किसी की निंदा न करें
चीजें खुद नहीं होतीं, उन्हें करना पड़ता है
समय का ध्यान नहीं रखने वाला व्यक्ति अपने जीवन में निर्विघ्न नहीं रहता।
इंसान के अंदर ही समा जाए, वो स्वाभिमान होता है... और जो बाहर छलक जाए वो अभिमान होता है...
महक गुलाब की आएगी तुम्हारे हाँथों से, किसी के रास्ते से
कामयाब होने के लिए कई बार हमें जो है उसी में शुरुआत कर लेनी होती है, भले तैयारी पूरी ना हो क्योंकि यह इंतजार करने से काफी बेहतर है।
शब्द यात्रा करते हैं इसलिए पीठ पीछे भी, किसी की निंदा न करें
चीजें खुद नहीं होतीं, उन्हें करना पड़ता है