उन जख्मों को भरने में वक़्त लगता है जिनमें शामिल हो अपनों की महेरबानियाँ

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चेहरे अक्सर झूठ भी बोला करते हैं.. रिश्तों की हकीकत वक़्त पर पता चलती हैं..

किसी को क्या बताये की कितने मजबूर है हम.. चाहा था सिर्फ एक तुमको और अब तुम से ही दूर है हम।

ज़िन्दगी चैन से गुज़र जाए , तू अगर ज़हन से उतर जाए

मेरी याद क़यामत की तरह है एक दिन ज़रूर आएगी

मेरे दिल से खेल तो रहे हो तुम पर...... जरा सम्भल के...... ये थोडा टूटा हुआ है कहीं तुम्हे ही लग ना जाए

पहले चुभा बहुत अब आदत सी हैं, ये दर्द पहले था अब इबादत सी हैं |

चेहरे अक्सर झूठ भी बोला करते हैं.. रिश्तों की हकीकत वक़्त पर पता चलती हैं..

किसी को क्या बताये की कितने मजबूर है हम.. चाहा था सिर्फ एक तुमको और अब तुम से ही दूर है हम।

ज़िन्दगी चैन से गुज़र जाए , तू अगर ज़हन से उतर जाए

मेरी याद क़यामत की तरह है एक दिन ज़रूर आएगी

मेरे दिल से खेल तो रहे हो तुम पर...... जरा सम्भल के...... ये थोडा टूटा हुआ है कहीं तुम्हे ही लग ना जाए

पहले चुभा बहुत अब आदत सी हैं, ये दर्द पहले था अब इबादत सी हैं |