इस बार मत बख़्शना, मौक़ा मिले तो.. तुम भी धोखा देना, धोखा मिले तो !! वफ़ा की जगह बेवफाई ने ली है विश्वास की जगह अब मक्कारी ने ली है बचकर रहना है अब इस दुनिया से क्योंकि प्यार की जगह अब धोखे ने ली है….
अर्ज़ किया है… कि… मेरी शायरी में अब भी दर्द की कमी है शायद तेरे धोखे का इंतज़ार है इस दिल को!
हमने उन पर आँखे बंद करके विश्वास क्या किया, हम अंधे हैं उन्होंने यह महसूस भी करवा दिया। ??
इस दुनिया मे कोई किसी का है ये तेरा सपना है! क्योंकि धोखा भी वही देता है जो तेरा अपना है!
इंसान को धोखा कभी भी इंसान नहीं देता…! उसकी उम्मीदें देती हैं जो वो दूसरों से अपेक्षा करता है.!!
“धोखे” की “फितरत” है,,, “धोखा” ही “खाने” की….!!!
इस बार मत बख़्शना, मौक़ा मिले तो.. तुम भी धोखा देना, धोखा मिले तो !! वफ़ा की जगह बेवफाई ने ली है विश्वास की जगह अब मक्कारी ने ली है बचकर रहना है अब इस दुनिया से क्योंकि प्यार की जगह अब धोखे ने ली है….
अर्ज़ किया है… कि… मेरी शायरी में अब भी दर्द की कमी है शायद तेरे धोखे का इंतज़ार है इस दिल को!
हमने उन पर आँखे बंद करके विश्वास क्या किया, हम अंधे हैं उन्होंने यह महसूस भी करवा दिया। ??
इस दुनिया मे कोई किसी का है ये तेरा सपना है! क्योंकि धोखा भी वही देता है जो तेरा अपना है!
इंसान को धोखा कभी भी इंसान नहीं देता…! उसकी उम्मीदें देती हैं जो वो दूसरों से अपेक्षा करता है.!!
“धोखे” की “फितरत” है,,, “धोखा” ही “खाने” की….!!!