एक वक़्त ऐसा आता है सब कुछ सही होने के बावजूद इंसान मुस्कुराना भूल जाता है..

एक वक़्त ऐसा आता है सब कुछ सही होने के बावजूद इंसान मुस्कुराना भूल जाता है..

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अपने रब के फैसले पर भला शक कैसे करुँ सजा दे रहा है अगर वो कुछ तो गुनाह रहा होगा..

कुछ चुप रहती हूँ, कुछ बोलती हूँ, कुछ रिश्ते मेरे इसी से संभले हुए हैं ......

जब लोगों के दिल भर जाते हैं..... तो दूर जाने के बहाने अपने आप मिल जाते हैं.....!

हमे बुरा न समझो जनाब हम दर्द लिखते है देते नहीं.

बुरा हमें भी लगता है बस तुम्हे एहसास नहीं होने देते

तब रिश्ता समझ लीजिए ख़त्म हो जाता है जब दो प्यार की बात करने वाले लोग बस काम की बात करने के लिए बातें करते हैं।

अपने रब के फैसले पर भला शक कैसे करुँ सजा दे रहा है अगर वो कुछ तो गुनाह रहा होगा..

कुछ चुप रहती हूँ, कुछ बोलती हूँ, कुछ रिश्ते मेरे इसी से संभले हुए हैं ......

जब लोगों के दिल भर जाते हैं..... तो दूर जाने के बहाने अपने आप मिल जाते हैं.....!

हमे बुरा न समझो जनाब हम दर्द लिखते है देते नहीं.

बुरा हमें भी लगता है बस तुम्हे एहसास नहीं होने देते

तब रिश्ता समझ लीजिए ख़त्म हो जाता है जब दो प्यार की बात करने वाले लोग बस काम की बात करने के लिए बातें करते हैं।