सिर्फ खड़े होकर पानी देखने से आप नदी नहीं पार कर सकते
जो ना मिले उसकी ही चाहत होती है, जो मिल जाये उसकी कदर कहाँ होती है
इंसान का व्यक्तित्व तब ही उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है
हौसले जिनके चट्टान हुआ करते हैं रास्ते उनके ही आसान हुआ करते हैं ए नादान न घबरा इन परेशानियों से ये तो पल भर के मेहमान हुआ करते हैं
कोशिश तब तक जारी रखो, जब तक मजिल ना मिल जाए..
""कामयाबी"" के सफर में "धूप" का बड़ा महत्व होता हैं! क्योंकि ""छांव"" मिलते ही "कदम" रुकने लगते है।
सिर्फ खड़े होकर पानी देखने से आप नदी नहीं पार कर सकते
जो ना मिले उसकी ही चाहत होती है, जो मिल जाये उसकी कदर कहाँ होती है
इंसान का व्यक्तित्व तब ही उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है
हौसले जिनके चट्टान हुआ करते हैं रास्ते उनके ही आसान हुआ करते हैं ए नादान न घबरा इन परेशानियों से ये तो पल भर के मेहमान हुआ करते हैं
कोशिश तब तक जारी रखो, जब तक मजिल ना मिल जाए..
""कामयाबी"" के सफर में "धूप" का बड़ा महत्व होता हैं! क्योंकि ""छांव"" मिलते ही "कदम" रुकने लगते है।