संघर्ष इंसान को मजूत बनाता है! फिर चाहे वह कितना भी कमजोर क्यों न हो.

संघर्ष इंसान को मजूत बनाता है! फिर चाहे वह कितना भी कमजोर क्यों न हो.

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किसी पर कभी भी बहुत ज्यादा निर्भर ना रहे क्योकि अंधेरो में परछाई भी साथ छोड़ देती है

जब अपने ही परिंदे किसी और के दाने के आदी हो जाए तो उन्हें आजाद कर देना चाहिए

मिट्टी का मटका और परिवार की क़ीमत सिर्फ बनाने वाले को ही पता होती है, तोड़ने वाले को नहीं !!

कुछ पाने के लिए कुछ करना पड़ता है

ढुढो सुकून तोह ख़ुद में हे दूसरो में सिर्फ उलझन मिलेगी

जब रिश्तों में झूठ बोलने की आवश्यकता महसूस होने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि रिश्ता समाप्ति की ओर है।

किसी पर कभी भी बहुत ज्यादा निर्भर ना रहे क्योकि अंधेरो में परछाई भी साथ छोड़ देती है

जब अपने ही परिंदे किसी और के दाने के आदी हो जाए तो उन्हें आजाद कर देना चाहिए

मिट्टी का मटका और परिवार की क़ीमत सिर्फ बनाने वाले को ही पता होती है, तोड़ने वाले को नहीं !!

कुछ पाने के लिए कुछ करना पड़ता है

ढुढो सुकून तोह ख़ुद में हे दूसरो में सिर्फ उलझन मिलेगी

जब रिश्तों में झूठ बोलने की आवश्यकता महसूस होने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि रिश्ता समाप्ति की ओर है।