उस जगह पे हमेशा खामोश रहना जहाँ दो कौड़ी के लोग अपनी हैसियत के गुण गाते हैं
रूठा हुआ है मुझसे इस बात पर ज़माना शामिल नहीं है मेरी फ़ितरत में सर झुकाना…
जो गया उसे जाने दो प्यार ही तो था कहीं और से आने दो
कौन कब किसका और कितना अपना है ..यह सिर्फ वक़्त बताता है
मुँह पर सच बोलने की आदत है इसलिए मै बहुत बत्तमीज हूँ.
“बात” उन्हीं की होती है, जिनमें कोई “बात” होती है..!
उस जगह पे हमेशा खामोश रहना जहाँ दो कौड़ी के लोग अपनी हैसियत के गुण गाते हैं
रूठा हुआ है मुझसे इस बात पर ज़माना शामिल नहीं है मेरी फ़ितरत में सर झुकाना…
जो गया उसे जाने दो प्यार ही तो था कहीं और से आने दो
कौन कब किसका और कितना अपना है ..यह सिर्फ वक़्त बताता है
मुँह पर सच बोलने की आदत है इसलिए मै बहुत बत्तमीज हूँ.
“बात” उन्हीं की होती है, जिनमें कोई “बात” होती है..!