सिर्फ उतना ही विन्रम बनो जितना जरूरी हो वेवजह की विनम्रता दुसरो के
“शिक्षक” और “सड़क” दोनों एक जैसे होते हैं खुद जहाँ है वहीं पर रहते हैं मगर दुसरो को उनकी मंजिल तक पहुंचा हीं देते हैं !
विचारों को पढ़कर छोड़ देने से जीवन में कोई बदलाव नहीं आता विचार तभी बदलाव लाते हैं जब विचारों को जीवन में उतारा जाता है
ये सोच है हम इसांनो की कि एक अकेला क्या कर सकता है पर देख जरा उस सूरज को वो अकेला ही तो चमकता है।
बोलकर सोचने से बेहतर है सोचकर बोलना
दुष्ट की मित्रता से शत्रु की मित्रता अच्छी होती है।
सिर्फ उतना ही विन्रम बनो जितना जरूरी हो वेवजह की विनम्रता दुसरो के
“शिक्षक” और “सड़क” दोनों एक जैसे होते हैं खुद जहाँ है वहीं पर रहते हैं मगर दुसरो को उनकी मंजिल तक पहुंचा हीं देते हैं !
विचारों को पढ़कर छोड़ देने से जीवन में कोई बदलाव नहीं आता विचार तभी बदलाव लाते हैं जब विचारों को जीवन में उतारा जाता है
ये सोच है हम इसांनो की कि एक अकेला क्या कर सकता है पर देख जरा उस सूरज को वो अकेला ही तो चमकता है।
बोलकर सोचने से बेहतर है सोचकर बोलना
दुष्ट की मित्रता से शत्रु की मित्रता अच्छी होती है।