ख्वाइशे के काफिले भी बड़े अजीब होते है.. ये गुज़रते भी वही से है जहाँ रास्ते नहीं होते...

ख्वाइशे के काफिले भी बड़े अजीब होते है.. ये गुज़रते भी वही से है जहाँ रास्ते नहीं होते...

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यदि आप सच कहते हैं, तो आपको कुछ याद रखने की जरूरत नहीं रहती

इंसान का व्यक्तित्व तब ही उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है

पृथ्वी पर कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसको समस्या न हो और पृथ्वी पर कोई समस्या ऐसी नहीं है जिसका कोई समाधान न हो... मंजिल चाहे कितनी भी ऊँची क्यों न हो, रास्ते हमेशा पैरों के नीचे ही होते हैं

ख़ुशियाँ चाहे किसी के भी साथ बाँट लो "लेकिन" गम भरोसेमंद के साथ ही बाँटना चाहिए

समय और भाग्य दोनों ही परिवर्तनशील है इन पर किसी को अहंकार नही करना चाहिए

हमें किसी भी ख़ास समय के लिए इन्तजार नहीं करना चाहिए बल्कि अपने हर समय को ख़ास बनाने की पूरी तरह से कोशिश करनी चाहिए

यदि आप सच कहते हैं, तो आपको कुछ याद रखने की जरूरत नहीं रहती

इंसान का व्यक्तित्व तब ही उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है

पृथ्वी पर कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसको समस्या न हो और पृथ्वी पर कोई समस्या ऐसी नहीं है जिसका कोई समाधान न हो... मंजिल चाहे कितनी भी ऊँची क्यों न हो, रास्ते हमेशा पैरों के नीचे ही होते हैं

ख़ुशियाँ चाहे किसी के भी साथ बाँट लो "लेकिन" गम भरोसेमंद के साथ ही बाँटना चाहिए

समय और भाग्य दोनों ही परिवर्तनशील है इन पर किसी को अहंकार नही करना चाहिए

हमें किसी भी ख़ास समय के लिए इन्तजार नहीं करना चाहिए बल्कि अपने हर समय को ख़ास बनाने की पूरी तरह से कोशिश करनी चाहिए