मौन रहना अच्छा है परन्तु....
ऊँचा उठने के लिए पंखों की जरुरत केवल पक्षियों को ही पड़ती है.. मनुष्य तो जितना विनम्रता से झुकता है उतना ही ऊपर उठता है।।
किसी के आगे हाथ फैलाने से अच्छा अपने हाथों को काम मे लगा दो
ईश्वर की महिमा की थाह कोई नहीं पा सकता. वह पल भर में राजा को रंक और रंक को राजा बना सकता है. धनी को निर्धन और निर्धन को धनी करना उसके लिए सहज है.
छोटे छोटे खर्चो से सावधान रहिये क्योंकि एक छोटा सा छेद बड़े से जहाज को डूबा सकता है।
जिसे तुम अपना समझ कर खुश हो रहे हो बस यही प्रसनता तुम्हारे दुखो का कारण है
मौन रहना अच्छा है परन्तु....
ऊँचा उठने के लिए पंखों की जरुरत केवल पक्षियों को ही पड़ती है.. मनुष्य तो जितना विनम्रता से झुकता है उतना ही ऊपर उठता है।।
किसी के आगे हाथ फैलाने से अच्छा अपने हाथों को काम मे लगा दो
ईश्वर की महिमा की थाह कोई नहीं पा सकता. वह पल भर में राजा को रंक और रंक को राजा बना सकता है. धनी को निर्धन और निर्धन को धनी करना उसके लिए सहज है.
छोटे छोटे खर्चो से सावधान रहिये क्योंकि एक छोटा सा छेद बड़े से जहाज को डूबा सकता है।
जिसे तुम अपना समझ कर खुश हो रहे हो बस यही प्रसनता तुम्हारे दुखो का कारण है