लोग क्या कहेंगे अगर ये सोच के आप कुछ नही कर रहे है। तो आप जीवन की पहली परीक्षा में हार गए"
अविनीत व्यक्ति को स्नेही होने पर भी मंत्रणा में नहीं रखना चाहिए।
किसी का जीवन बदलेगा किसी का 'दिल' बदलेगा, तो.. किसी के 'दिन' बदलेंगे...!
खूबी और खामी दोनो ही होती है लोगों में आप क्या तलाशते हो ये महत्वपूर्ण है
उलझने मैंने कई झुक के भी सुलझायी है लोग सारे तो कद के बराबर नही होते
"सार्वजनिक" रूप से की गई "आलोचना" अपमान में बदल जाती है और .... "एकांत" में बताने पर "सलाह" बन जाती है...!!
लोग क्या कहेंगे अगर ये सोच के आप कुछ नही कर रहे है। तो आप जीवन की पहली परीक्षा में हार गए"
अविनीत व्यक्ति को स्नेही होने पर भी मंत्रणा में नहीं रखना चाहिए।
किसी का जीवन बदलेगा किसी का 'दिल' बदलेगा, तो.. किसी के 'दिन' बदलेंगे...!
खूबी और खामी दोनो ही होती है लोगों में आप क्या तलाशते हो ये महत्वपूर्ण है
उलझने मैंने कई झुक के भी सुलझायी है लोग सारे तो कद के बराबर नही होते
"सार्वजनिक" रूप से की गई "आलोचना" अपमान में बदल जाती है और .... "एकांत" में बताने पर "सलाह" बन जाती है...!!