यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

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लक्ष्मी चंचल है. प्राण, जीवन, शरीर सब कुछ चंचल और नाशवान हैं. संसार में केवल धर्म ही निश्चल है.

लाइफ में गिरना बहुत जरूरी है क्योंकि गिरने के बाद ऊपर उठने के अलावा दूसरा कोई ऑप्शन नही बचता

कोई कितना भी झूठा और कपटी हो आपके साथ आप तब भी सच्चे बने रहिए क्योंकि किसी बीमार को देखकर स्वयं को बीमार कर लेना ये समझदारी नही मूर्खता है..

रिश्तो में झुकना कोई अजीब बात नही, सूरज भी तो ढल जाता है चाँद के लिए.

दूसरों का सहारा लेने पर व्यक्ति का स्वयं का अस्तित्व गौण हो जाता है, जिस प्रकार सूर्योदय होने पर चंद्रमा का प्रकाश अपनी चमक खो बैठता है. अतः महान वही है जो अपने बल पर खड़ा है.

अच्छे के साथ बुरा भी उसके अच्छे के लिए ही होता है..

लक्ष्मी चंचल है. प्राण, जीवन, शरीर सब कुछ चंचल और नाशवान हैं. संसार में केवल धर्म ही निश्चल है.

लाइफ में गिरना बहुत जरूरी है क्योंकि गिरने के बाद ऊपर उठने के अलावा दूसरा कोई ऑप्शन नही बचता

कोई कितना भी झूठा और कपटी हो आपके साथ आप तब भी सच्चे बने रहिए क्योंकि किसी बीमार को देखकर स्वयं को बीमार कर लेना ये समझदारी नही मूर्खता है..

रिश्तो में झुकना कोई अजीब बात नही, सूरज भी तो ढल जाता है चाँद के लिए.

दूसरों का सहारा लेने पर व्यक्ति का स्वयं का अस्तित्व गौण हो जाता है, जिस प्रकार सूर्योदय होने पर चंद्रमा का प्रकाश अपनी चमक खो बैठता है. अतः महान वही है जो अपने बल पर खड़ा है.

अच्छे के साथ बुरा भी उसके अच्छे के लिए ही होता है..