यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

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बादशाह सिर्फ वक्त होता है, इन्सान तो यूँ ही गुरुर करता है !!

देश में "राजा" समाज में "गुरु" परिवार में "पिता" घर में "स्त्री" ये कभी "साधारण" नहीं होते क्योंकि ~ निर्माण और प्रलय ~ इन्हीं के "हाथ" में होता है

यदि आपका लक्ष्य आपको सुबह उठे के लिए मजबूर नही करता, तो यकीन मानिए आपका लक्ष्य बहुत छोटा है

जो नहीं लड़ते वही तो हार जाते हैं हौसले वाले तो बाज़ी मार जाते हैं...

समय अच्छा हो तो बन जाते है सभी साथी लेकिन समय मुश्किल हो तो खुद पे भारोश रखना..

. जितना ज्यादा दूर से देखोगे लोग उतने ज्यादा अच्छे लगेंगे

बादशाह सिर्फ वक्त होता है, इन्सान तो यूँ ही गुरुर करता है !!

देश में "राजा" समाज में "गुरु" परिवार में "पिता" घर में "स्त्री" ये कभी "साधारण" नहीं होते क्योंकि ~ निर्माण और प्रलय ~ इन्हीं के "हाथ" में होता है

यदि आपका लक्ष्य आपको सुबह उठे के लिए मजबूर नही करता, तो यकीन मानिए आपका लक्ष्य बहुत छोटा है

जो नहीं लड़ते वही तो हार जाते हैं हौसले वाले तो बाज़ी मार जाते हैं...

समय अच्छा हो तो बन जाते है सभी साथी लेकिन समय मुश्किल हो तो खुद पे भारोश रखना..

. जितना ज्यादा दूर से देखोगे लोग उतने ज्यादा अच्छे लगेंगे