यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

Share:

More Like This

जिंदगी में रह गई कुछ खाली जगह को सिर्फ समझौते ही भरते है

विद्या निरंतरता से अक्षुण्ण बनी रहती है. आलस्य से उसका लोप हो जाता है. धन यदि दूसरे के पास है तो अपना होने पर भी वह जरूरत पड़ने पर काम नहीं आता है. खेत में बिज न पड़े तो वह बंजर हो जाता है, उसी प्रकार कुशल सेनापति के अभाव में चतुरंगिणी सेना भी नष्ट हो जाती है.

मुश्किलें हमेशा बेहतरीन लोगों के हिस्से में आती है, क्योंकि वो लोग ही उन्हें बेहतरीन तरीके से अंजाम देने की ताकत रखते हैं

एक अकेला पहिया नहीं चला करता।

जीवन मे पछतावा करना छोडो कुछ ऐसा करो कि लोग तुम्हें छोड़ देने पर पछताए।

हमेशा अपना best  करो | जो तुम अभी बोते हो उसकी फसल बाद में काटते हो

जिंदगी में रह गई कुछ खाली जगह को सिर्फ समझौते ही भरते है

विद्या निरंतरता से अक्षुण्ण बनी रहती है. आलस्य से उसका लोप हो जाता है. धन यदि दूसरे के पास है तो अपना होने पर भी वह जरूरत पड़ने पर काम नहीं आता है. खेत में बिज न पड़े तो वह बंजर हो जाता है, उसी प्रकार कुशल सेनापति के अभाव में चतुरंगिणी सेना भी नष्ट हो जाती है.

मुश्किलें हमेशा बेहतरीन लोगों के हिस्से में आती है, क्योंकि वो लोग ही उन्हें बेहतरीन तरीके से अंजाम देने की ताकत रखते हैं

एक अकेला पहिया नहीं चला करता।

जीवन मे पछतावा करना छोडो कुछ ऐसा करो कि लोग तुम्हें छोड़ देने पर पछताए।

हमेशा अपना best  करो | जो तुम अभी बोते हो उसकी फसल बाद में काटते हो