अपने काम को एक रहस्य ही रहने दो लोगो को काम का नतीजा दिखाओ
रख हौसला वो मन्ज़र भी आएगा, प्यासे के पास चल के समंदर भी आयेगा,
कोई जाति नीच नही होती लेकिन नीच आदमी हर जाति में होता है
कोई काम शुरू करने से पहले, स्वयम से तीन प्रश्न कीजिये – मैं ये क्यों कर रहा हूँ, इसके परिणाम क्या हो सकते हैं और क्या मैं सफल होऊंगा. और जब गहरई से सोचने पर इन प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर मिल जायें,तभी आगे बढें
मनुष्य की वाणी ही विष और अमृत की खान है।
सफल होने के बाद भी आप खुद को उस व्यक्ति से बड़ा ना समझे जिसके हाथों को पकड़ कर आपने सफलता की सीढ़ी चढ़ी
अपने काम को एक रहस्य ही रहने दो लोगो को काम का नतीजा दिखाओ
रख हौसला वो मन्ज़र भी आएगा, प्यासे के पास चल के समंदर भी आयेगा,
कोई जाति नीच नही होती लेकिन नीच आदमी हर जाति में होता है
कोई काम शुरू करने से पहले, स्वयम से तीन प्रश्न कीजिये – मैं ये क्यों कर रहा हूँ, इसके परिणाम क्या हो सकते हैं और क्या मैं सफल होऊंगा. और जब गहरई से सोचने पर इन प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर मिल जायें,तभी आगे बढें
मनुष्य की वाणी ही विष और अमृत की खान है।
सफल होने के बाद भी आप खुद को उस व्यक्ति से बड़ा ना समझे जिसके हाथों को पकड़ कर आपने सफलता की सीढ़ी चढ़ी