अपने जीवन की तुलना किसी के साथ नहीं करनी चाहिए "सूर्य" और "चद्रमा" के बीच कोई तुलना नहीं हैं जब जिसका वक़्त आता है तभी वो चमकता है
अकेलापन सदैव आपका एक महत्पूर्ण व्यक्ति से परिचय करवाएगा और व्यक्ति है.. स्वयं आप
भूल जीवन का एक पेज है और रिश्ते पूरी किताब, जरूरत पड़े तो भूल का एक पेज फाड़ देना लेकिन एक छोटे से पेज के लिए पूरी किताब नही
अविनीत व्यक्ति को स्नेही होने पर भी मंत्रणा में नहीं रखना चाहिए।
जिन रिश्तों में आपकी मौजूदगी का कोई मतलब नही हो वहाँ से
अगर ईश्वर ने आपको नई शुरुआत करने का मौका दिया है, फिर पुरानी गलतियों को मत दोहराए
अपने जीवन की तुलना किसी के साथ नहीं करनी चाहिए "सूर्य" और "चद्रमा" के बीच कोई तुलना नहीं हैं जब जिसका वक़्त आता है तभी वो चमकता है
अकेलापन सदैव आपका एक महत्पूर्ण व्यक्ति से परिचय करवाएगा और व्यक्ति है.. स्वयं आप
भूल जीवन का एक पेज है और रिश्ते पूरी किताब, जरूरत पड़े तो भूल का एक पेज फाड़ देना लेकिन एक छोटे से पेज के लिए पूरी किताब नही
अविनीत व्यक्ति को स्नेही होने पर भी मंत्रणा में नहीं रखना चाहिए।
जिन रिश्तों में आपकी मौजूदगी का कोई मतलब नही हो वहाँ से
अगर ईश्वर ने आपको नई शुरुआत करने का मौका दिया है, फिर पुरानी गलतियों को मत दोहराए