यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

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अपेक्षाएं जहां खत्म होती हैं, सुकून वहीं से शुरू होता है

पंख मिलते ही जो जमीन भूल जाता है वो ज्यादा दिन आकाश में उड़ नही पता है..

पंछी ने जब किया पंखों पर विश्वास दूर दूर तक उसका ही हो गया आकाश

पत्थर की कीमत जब समझ में आती है सुनसान सड़क पर जब कुत्ते घेर लेते है

इंसान की बुद्धिमानी उसके चेहरे या कपड़ो से नही होती बल्कि उसकी आदतों और बातचीत करने के तरीके से झलकती है

सामने हो मंजिल तो रास्ते न मोड़ना, जो भी मन में हो वो सपना न तोड़ना कदम कदम पे मिलेगी मुश्किल आपको, बस सितारे चुनने के लिए जमीन मत छोड़ना

अपेक्षाएं जहां खत्म होती हैं, सुकून वहीं से शुरू होता है

पंख मिलते ही जो जमीन भूल जाता है वो ज्यादा दिन आकाश में उड़ नही पता है..

पंछी ने जब किया पंखों पर विश्वास दूर दूर तक उसका ही हो गया आकाश

पत्थर की कीमत जब समझ में आती है सुनसान सड़क पर जब कुत्ते घेर लेते है

इंसान की बुद्धिमानी उसके चेहरे या कपड़ो से नही होती बल्कि उसकी आदतों और बातचीत करने के तरीके से झलकती है

सामने हो मंजिल तो रास्ते न मोड़ना, जो भी मन में हो वो सपना न तोड़ना कदम कदम पे मिलेगी मुश्किल आपको, बस सितारे चुनने के लिए जमीन मत छोड़ना