जिस संबंध में आपके साथ सिर्फ मजाक हो... उस संबंध को ऐसे तोड़ दो जैसे वो पूरा संबंध ही एक मजाक हो
इंसान की तरह बोलना न आये तो जानवर की तरह मौन रहना अच्छा है।
नेत्र केवल हमे दृष्टि प्रदान करते है परंतु हम कब.. किसमे क्या देखते है ये हमारी भावनाओ पर निर्भर करता है।
कभी कभी आप बिना कुछ गलत किये भी बुरे बन जाते है क्योंकि जैसा लोग चाहते थे आप वैसा नही करते
कही ज़िद पूरी ... कही जरूरत भी अधूरी..... कही सुगंध भी नहीं.. कहीं .. पूरा जीवन कस्तूरी.! इसीका नाम तो है जिंदगी.......
मुझे सफलता का उपाय नहीं मालूम लेकिन यह मालूम है कि सब को खुश करने का प्रयत्न असफलता का उपाय
जिस संबंध में आपके साथ सिर्फ मजाक हो... उस संबंध को ऐसे तोड़ दो जैसे वो पूरा संबंध ही एक मजाक हो
इंसान की तरह बोलना न आये तो जानवर की तरह मौन रहना अच्छा है।
नेत्र केवल हमे दृष्टि प्रदान करते है परंतु हम कब.. किसमे क्या देखते है ये हमारी भावनाओ पर निर्भर करता है।
कभी कभी आप बिना कुछ गलत किये भी बुरे बन जाते है क्योंकि जैसा लोग चाहते थे आप वैसा नही करते
कही ज़िद पूरी ... कही जरूरत भी अधूरी..... कही सुगंध भी नहीं.. कहीं .. पूरा जीवन कस्तूरी.! इसीका नाम तो है जिंदगी.......
मुझे सफलता का उपाय नहीं मालूम लेकिन यह मालूम है कि सब को खुश करने का प्रयत्न असफलता का उपाय