यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

Share:

More Like This

मुस्करा कर देखो तो सारा जहाॅ रंगीन है, वर्ना भीगी पलको से तो आईना भी धुधंला नजर आता है।

शीशे की तरह चरित्रवान बनो ताकि लोग तुम्हे देखकर अपने चरित्र के दोषों को दूर करें जैसा कि वे शीशे को देखकर अपने चेहरे के दोषों को दूर करते हैं

किरण चाहे सूर्य की हो या आशा की, जब भी निकलती है तो सभी अंधकारों को मिटा देती है

कभी भी अपने अतीत, धन, नकारात्मकता और अन्य लोगो के CONTROL में न रहे

मेहनत का फल और समस्या का हल देर से ही सही पर मिलता जरूर है..

प्रत्येक अवसर के लिए तैयार रहना ही सफलता है

मुस्करा कर देखो तो सारा जहाॅ रंगीन है, वर्ना भीगी पलको से तो आईना भी धुधंला नजर आता है।

शीशे की तरह चरित्रवान बनो ताकि लोग तुम्हे देखकर अपने चरित्र के दोषों को दूर करें जैसा कि वे शीशे को देखकर अपने चेहरे के दोषों को दूर करते हैं

किरण चाहे सूर्य की हो या आशा की, जब भी निकलती है तो सभी अंधकारों को मिटा देती है

कभी भी अपने अतीत, धन, नकारात्मकता और अन्य लोगो के CONTROL में न रहे

मेहनत का फल और समस्या का हल देर से ही सही पर मिलता जरूर है..

प्रत्येक अवसर के लिए तैयार रहना ही सफलता है