यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

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जो कभी उद्यंडका-सा वेष नहीं बनाता, दूसरों के सामने अपने पराक्रम की डींग नही हांकता, क्रोध से व्याकुल होने पर भी कटुवचन नहीं बोलता, उस मनुष्य को लोग सदा ही प्यारा बना लेते हैं।

कभी ना कहो की दिन अपने ख़राब है। समझ लो की हम काँटों से घिर गए गुलाब है।।

सफलता उन्ही कामो को करने से मिलती है... जिन कामो को करने में आपका मन नही लगता..

परिस्थिति कुछ भी हो डट कर खड़े रहना चाहिए, सही समय आने पर खट्टी कैरी भी बदल कर मीठा आम बन जाती है...

कोशिश तब तक जारी रखो, जब तक मजिल ना मिल जाए..

इंसान कहता हैं कि पैसा आये तो मैं कुछ कर के दिखाऊ और पैसा कहता हैं कि तू कुछ कर तो मैं आऊं.

जो कभी उद्यंडका-सा वेष नहीं बनाता, दूसरों के सामने अपने पराक्रम की डींग नही हांकता, क्रोध से व्याकुल होने पर भी कटुवचन नहीं बोलता, उस मनुष्य को लोग सदा ही प्यारा बना लेते हैं।

कभी ना कहो की दिन अपने ख़राब है। समझ लो की हम काँटों से घिर गए गुलाब है।।

सफलता उन्ही कामो को करने से मिलती है... जिन कामो को करने में आपका मन नही लगता..

परिस्थिति कुछ भी हो डट कर खड़े रहना चाहिए, सही समय आने पर खट्टी कैरी भी बदल कर मीठा आम बन जाती है...

कोशिश तब तक जारी रखो, जब तक मजिल ना मिल जाए..

इंसान कहता हैं कि पैसा आये तो मैं कुछ कर के दिखाऊ और पैसा कहता हैं कि तू कुछ कर तो मैं आऊं.