इंसान को अलार्म नही, जिम्मेदारियां जगाती है
आँखे भी खोलनी पड़ती है उजाले के लिए, केवल सूरज के निकलने से ही अँधेरा नही जाता
जो आपके शब्दों का "मूल्य" नहीं समझता उसके सामने मौन रहना ही बेहतर है.
शब्द यात्रा करते हैं इसलिए पीठ पीछे भी, किसी की निंदा न करें
खुद को आप इतना बेहतर बनाएं कि जो कल आप थे,वह आज ना रहें...
हमेशा उम्मीद से अधिक करो... सफलता आपके कदम चूमेगी...
इंसान को अलार्म नही, जिम्मेदारियां जगाती है
आँखे भी खोलनी पड़ती है उजाले के लिए, केवल सूरज के निकलने से ही अँधेरा नही जाता
जो आपके शब्दों का "मूल्य" नहीं समझता उसके सामने मौन रहना ही बेहतर है.
शब्द यात्रा करते हैं इसलिए पीठ पीछे भी, किसी की निंदा न करें
खुद को आप इतना बेहतर बनाएं कि जो कल आप थे,वह आज ना रहें...
हमेशा उम्मीद से अधिक करो... सफलता आपके कदम चूमेगी...