यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

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सत्य कड़वा नहीं होता (जनाब,) तुम सिर्फ झूठ के स्वाद से वाकिफ़ हो।

वृक्ष कभी इस बात पर व्यथित नहीं होता कि उसने कितने पुष्प खो दिए वह सदैव नए फूलों के सृजन में व्यस्त रहता है जीवन में कितना कुछ खो गया, इस पीड़ा को भूल कर, क्या नया कर सकते हैं, इसी में जीवन की सार्थकता है

जिन्दगी की हर सुबह कुछ शर्ते लेके आती है। और जिन्दगी की हर शाम कुछ तर्जुबे देके जाती है।

जीवन मे पछतावा करना छोड़ो और कुछ ऐसा करो कि लोग तुम्हे छोड़ देने पर पछताए।

क्रोध हवा का वह झोंका है, जो बुद्धि के दीपक को बुझा देता है जिनकी भाषा में सभ्यता होती है उनके जीवन में सदैव भव्यता होती है.

भरोशा करो लेकिन किसी के भरोशे मत रहो ।

सत्य कड़वा नहीं होता (जनाब,) तुम सिर्फ झूठ के स्वाद से वाकिफ़ हो।

वृक्ष कभी इस बात पर व्यथित नहीं होता कि उसने कितने पुष्प खो दिए वह सदैव नए फूलों के सृजन में व्यस्त रहता है जीवन में कितना कुछ खो गया, इस पीड़ा को भूल कर, क्या नया कर सकते हैं, इसी में जीवन की सार्थकता है

जिन्दगी की हर सुबह कुछ शर्ते लेके आती है। और जिन्दगी की हर शाम कुछ तर्जुबे देके जाती है।

जीवन मे पछतावा करना छोड़ो और कुछ ऐसा करो कि लोग तुम्हे छोड़ देने पर पछताए।

क्रोध हवा का वह झोंका है, जो बुद्धि के दीपक को बुझा देता है जिनकी भाषा में सभ्यता होती है उनके जीवन में सदैव भव्यता होती है.

भरोशा करो लेकिन किसी के भरोशे मत रहो ।