यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

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'बदलना' तय है ! हर चीज़ का.. इस संसार में...! बस कर्म अच्छे करें..

कभी गिर जाओ तो खुद ही उठ जाना, क्यूँकी लोग सिर्फ गिरे हुए पैसे उठाते है इंसान नहीं

पत्तों सी होती है कई रिश्तों की उम्र...! आज हरे...........कल सूखे क्यों न हम जड़ों से रिश्ते निभाना सीखें...

मौन एक ऐसा तर्क है जिसका खण्डन कर पाना अत्यंत दुष्कर है

लंबी छलांगों से कही बेहतर है निरंतर बढ़ते कदम... जी एक दिन आपको मंजिल तक ले जाएंगे

जिंदगी बहुत छोटी है इसलिए किसी इंसान का पीछा करने से कई गुना बेहतर है अपने सपनो को पूरा करना

'बदलना' तय है ! हर चीज़ का.. इस संसार में...! बस कर्म अच्छे करें..

कभी गिर जाओ तो खुद ही उठ जाना, क्यूँकी लोग सिर्फ गिरे हुए पैसे उठाते है इंसान नहीं

पत्तों सी होती है कई रिश्तों की उम्र...! आज हरे...........कल सूखे क्यों न हम जड़ों से रिश्ते निभाना सीखें...

मौन एक ऐसा तर्क है जिसका खण्डन कर पाना अत्यंत दुष्कर है

लंबी छलांगों से कही बेहतर है निरंतर बढ़ते कदम... जी एक दिन आपको मंजिल तक ले जाएंगे

जिंदगी बहुत छोटी है इसलिए किसी इंसान का पीछा करने से कई गुना बेहतर है अपने सपनो को पूरा करना