यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

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ये वक्त की नजाकत और बदलते दौर की मजबूरी है लड़के को पराठे ? और लड़की को कराटे ? सिखाना बहुत जरूरी है

हमेशा दूसरों की सफलता के बारे में जानने के बजाय खुद की सफलता पर काम कीजिए

“अहंकार” और “संस्कार” में फ़र्क़ है… “अहंकार” दूसरों को झुकाकर खुश होता है, “संस्कार” स्वयं झुककर खुश होता है..!

सत्य भी यदि अनुचित है तो उसे नहीं कहना चाहिए।

जीवन मे आपको रोकने-टोकने वाला कोई है तो उसका एहसान मानिए, क्योंकि जिन बागों में माली नही होते, वो बाग जल्दी उजड़ जाते है

मन खुश है तो,, एक बूँद भी बरसात है.. दुखी मन के आगे,, समंदर की क्या औकात है

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“अहंकार” और “संस्कार” में फ़र्क़ है… “अहंकार” दूसरों को झुकाकर खुश होता है, “संस्कार” स्वयं झुककर खुश होता है..!

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जीवन मे आपको रोकने-टोकने वाला कोई है तो उसका एहसान मानिए, क्योंकि जिन बागों में माली नही होते, वो बाग जल्दी उजड़ जाते है

मन खुश है तो,, एक बूँद भी बरसात है.. दुखी मन के आगे,, समंदर की क्या औकात है