यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

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खुशियाँ चाहे किसीके साथ भी बाँट लो, लेकिन गम भरोसेमंद के साथ ही बाँटना चाहिए

कमियां ढूंढने में कोई दिक्कत नहीं है, बस शुरुआत खुद से करें!

मुस्कुराने की आदत डालो क्यों की रुलाने वालो की कमी नहीं हैं..

उम्मीद हमे कभी भी छोड़ कर नहीं जाती बस हम ही उसे छोड़ देते है

यदि आप वही करते है जो आप हमेशा से करते आये है तो आप को वही मिलेगा जो हमेशा से मिलता आया है

लक्ष्मी चंचल है. प्राण, जीवन, शरीर सब कुछ चंचल और नाशवान हैं. संसार में केवल धर्म ही निश्चल है.

खुशियाँ चाहे किसीके साथ भी बाँट लो, लेकिन गम भरोसेमंद के साथ ही बाँटना चाहिए

कमियां ढूंढने में कोई दिक्कत नहीं है, बस शुरुआत खुद से करें!

मुस्कुराने की आदत डालो क्यों की रुलाने वालो की कमी नहीं हैं..

उम्मीद हमे कभी भी छोड़ कर नहीं जाती बस हम ही उसे छोड़ देते है

यदि आप वही करते है जो आप हमेशा से करते आये है तो आप को वही मिलेगा जो हमेशा से मिलता आया है

लक्ष्मी चंचल है. प्राण, जीवन, शरीर सब कुछ चंचल और नाशवान हैं. संसार में केवल धर्म ही निश्चल है.