यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

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लोग आपके रास्ते में गड्ढे करें तो परेशान मत होना... क्योंकि ये वही लोग हैं जो आपको छलांग लगाना सिखाएंगे

वहाँ हो जाता है सन्नाटा एक दिन जहाँ हर वक़्त पैसा बोलता है

किसी को डर है कि भगवान देख रहा है किसी को भरोसा है कि भगवान देख रहा है

कोई तब तक आपकी सवारी नहीं कर सकता जब तक आपकी पीठ झुकी ना हो

पत्तों सी होती है कई रिश्तों की उम्र...! आज हरे...........कल सूखे क्यों न हम जड़ों से रिश्ते निभाना सीखें...

काम मनुष्य का सबसे बड़ा रोग है. अज्ञान या मोह सबसे बड़ा शत्रु है. क्रोध मनुष्य को जला देने वाली भयंकर अग्नि है तथा आत्मज्ञान ही परम सुख है.

लोग आपके रास्ते में गड्ढे करें तो परेशान मत होना... क्योंकि ये वही लोग हैं जो आपको छलांग लगाना सिखाएंगे

वहाँ हो जाता है सन्नाटा एक दिन जहाँ हर वक़्त पैसा बोलता है

किसी को डर है कि भगवान देख रहा है किसी को भरोसा है कि भगवान देख रहा है

कोई तब तक आपकी सवारी नहीं कर सकता जब तक आपकी पीठ झुकी ना हो

पत्तों सी होती है कई रिश्तों की उम्र...! आज हरे...........कल सूखे क्यों न हम जड़ों से रिश्ते निभाना सीखें...

काम मनुष्य का सबसे बड़ा रोग है. अज्ञान या मोह सबसे बड़ा शत्रु है. क्रोध मनुष्य को जला देने वाली भयंकर अग्नि है तथा आत्मज्ञान ही परम सुख है.