यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

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खुशियों की तलाश वहाँ मत करो जहाँ गम को छोड़ा था

ख्वाहिश भले ही छोटी सी हो, लेकिन उसे पूरा करने की जिद होनी चाहिये

जो व्यवहार आपको दूसरों से पसंद ना हो ऐसा व्यवहार आप दूसरों के साथ भी ना करे

मुस्करा कर देखो तो सारा जहाॅ रंगीन है, वर्ना भीगी पलको से तो आईना भी धुधंला नजर आता है।

मनुष्य अकेला ही जन्म लेता है, अकेला ही दुःख भोगता है, अकेला ही मोक्ष का अधिकारी होता है और अकेला ही नरक जाता है. अतः रिश्ते-नाते तो क्षण भंगुर हैं, हमें अकेले ही दुनिया के मंच पर अभिनय करना पड़ता है.

जो कभी उद्यंडका-सा वेष नहीं बनाता, दूसरों के सामने अपने पराक्रम की डींग नही हांकता, क्रोध से व्याकुल होने पर भी कटुवचन नहीं बोलता, उस मनुष्य को लोग सदा ही प्यारा बना लेते हैं।

खुशियों की तलाश वहाँ मत करो जहाँ गम को छोड़ा था

ख्वाहिश भले ही छोटी सी हो, लेकिन उसे पूरा करने की जिद होनी चाहिये

जो व्यवहार आपको दूसरों से पसंद ना हो ऐसा व्यवहार आप दूसरों के साथ भी ना करे

मुस्करा कर देखो तो सारा जहाॅ रंगीन है, वर्ना भीगी पलको से तो आईना भी धुधंला नजर आता है।

मनुष्य अकेला ही जन्म लेता है, अकेला ही दुःख भोगता है, अकेला ही मोक्ष का अधिकारी होता है और अकेला ही नरक जाता है. अतः रिश्ते-नाते तो क्षण भंगुर हैं, हमें अकेले ही दुनिया के मंच पर अभिनय करना पड़ता है.

जो कभी उद्यंडका-सा वेष नहीं बनाता, दूसरों के सामने अपने पराक्रम की डींग नही हांकता, क्रोध से व्याकुल होने पर भी कटुवचन नहीं बोलता, उस मनुष्य को लोग सदा ही प्यारा बना लेते हैं।