जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं कि उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की
हम भी परिंदो की तरह एक दिन उड़ेंगे लड़ना पड़े अगर रातों से तो लड़ेंगे, इस बार न कर पाए अगर मुकाम हासिल, तो दुबारा उससे भी ज्यादा मेहनत करेंगे।
ख़ुद की जिम्मेवारी और काम को सौंप बड़े गुमान से बैठा है, ख़ुदा ने जबसे माँ बनाई है खुद इत्मिनान से बैठा है।
जब रिश्तों में झूठ बोलने की आवश्यकता महसूस होने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि रिश्ता समाप्ति की ओर है
क्रोध हवा का वह झोंका है, जो बुद्धि के दीपक को बुझा देता है जिनकी भाषा में सभ्यता होती है उनके जीवन में सदैव भव्यता होती है.
वक़्त का खाश होना जरूरी नही खाश के लिए वक़्त होना जरूरी है
जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं कि उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की
हम भी परिंदो की तरह एक दिन उड़ेंगे लड़ना पड़े अगर रातों से तो लड़ेंगे, इस बार न कर पाए अगर मुकाम हासिल, तो दुबारा उससे भी ज्यादा मेहनत करेंगे।
ख़ुद की जिम्मेवारी और काम को सौंप बड़े गुमान से बैठा है, ख़ुदा ने जबसे माँ बनाई है खुद इत्मिनान से बैठा है।
जब रिश्तों में झूठ बोलने की आवश्यकता महसूस होने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि रिश्ता समाप्ति की ओर है
क्रोध हवा का वह झोंका है, जो बुद्धि के दीपक को बुझा देता है जिनकी भाषा में सभ्यता होती है उनके जीवन में सदैव भव्यता होती है.
वक़्त का खाश होना जरूरी नही खाश के लिए वक़्त होना जरूरी है