यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

Share:

More Like This

लाख दलदल हो पाँव जमाए रखिये, हाथ खाली ही सही ऊपर उठाये रखिये, कौन कहता है छलनी में पानी रुक नहीं सकता, बर्फ बनने तक हौसला बनाये रखिये

आपके सामने जो दूसरों की बुराई करता है उससे यह उम्मीद मत रखिए कि वह दूसरों के सामने आपकी तारीफ करेगा

खुश रहना है तो जिंदगी के फैसले अपनी परिस्थिति देखकर ले दुनिया को देखकर जो फैसले लेते है वो दुःखी ही रहते हैं

जिंदगी को सफल बनाने के लिए बातों से नहीं रातों से लड़ना पड़ता है

खुद को भी कभी महसूस कर लिया करो, कुछ रौनकें खुद से भी हुआ करती हैं!

ऐसी कोई मंजिल नहीं जहां तक पहुंचने का कोई रास्ता ना हो .

लाख दलदल हो पाँव जमाए रखिये, हाथ खाली ही सही ऊपर उठाये रखिये, कौन कहता है छलनी में पानी रुक नहीं सकता, बर्फ बनने तक हौसला बनाये रखिये

आपके सामने जो दूसरों की बुराई करता है उससे यह उम्मीद मत रखिए कि वह दूसरों के सामने आपकी तारीफ करेगा

खुश रहना है तो जिंदगी के फैसले अपनी परिस्थिति देखकर ले दुनिया को देखकर जो फैसले लेते है वो दुःखी ही रहते हैं

जिंदगी को सफल बनाने के लिए बातों से नहीं रातों से लड़ना पड़ता है

खुद को भी कभी महसूस कर लिया करो, कुछ रौनकें खुद से भी हुआ करती हैं!

ऐसी कोई मंजिल नहीं जहां तक पहुंचने का कोई रास्ता ना हो .