सलाह के सौ शब्दों से ज्यादा अनुभव की एक ठोकर इंसान को बहुत मजबूत बनाती है
न तो इतने कड़वे बनो की कोई थूक दे और न ही इतने मीठे बनों की कोई निगल जाए.
अपनी छवि का ध्यान रखे, क्योंकि इसकी आयु आपकी आयु से कही ज्यादा होती है
लोग बुरे नहीं होते... बस जब आपके मतलब के नहीं होते तो बुरे लगने लगते हैं....
साधुजन के दर्शन से पुण्य प्राप्त होता है. साधु तीर्थों के समान होते हैं, तीर्थों का फल तो कुछ समय बाद मिलता है, किन्तु साधु समागम तुरंत फल देता है’
ख़ुद की जिम्मेवारी और काम को सौंप बड़े गुमान से बैठा है, ख़ुदा ने जबसे माँ बनाई है खुद इत्मिनान से बैठा है।
सलाह के सौ शब्दों से ज्यादा अनुभव की एक ठोकर इंसान को बहुत मजबूत बनाती है
न तो इतने कड़वे बनो की कोई थूक दे और न ही इतने मीठे बनों की कोई निगल जाए.
अपनी छवि का ध्यान रखे, क्योंकि इसकी आयु आपकी आयु से कही ज्यादा होती है
लोग बुरे नहीं होते... बस जब आपके मतलब के नहीं होते तो बुरे लगने लगते हैं....
साधुजन के दर्शन से पुण्य प्राप्त होता है. साधु तीर्थों के समान होते हैं, तीर्थों का फल तो कुछ समय बाद मिलता है, किन्तु साधु समागम तुरंत फल देता है’
ख़ुद की जिम्मेवारी और काम को सौंप बड़े गुमान से बैठा है, ख़ुदा ने जबसे माँ बनाई है खुद इत्मिनान से बैठा है।