अवसर और सूर्योदय में एक ही समानता है.. देर करने वाले इन्हें खो देते हैं!!
खुद को बदलने का सबसे तेज तरीका है, उन लोगों के साथ रहना जो पहले से ही उस रस्ते पर है जिस पर आप जाना चाहते हैं
परिस्थिति कुछ भी हो डट कर खड़े रहना चाहिए, सही समय आने पर खट्टी कैरी भी बदल कर मीठा आम बन जाती है...
तन की जाने मन की जाने जाने चित्त की चोरी उस मालिक से क्या छुपावे जिसके हाथ है सब की डोर
अपने अंदर से अहंकार को निकालकर स्वयं को हल्का किजिये क्योंकि ऊँचा वही उठता है जो हल्का होता है।
क़दर तो वो होती है जो किसी की मौजूदगी में हो, जो किसी के बाद हो.... उसे पछतावा कहते हैं ।
अवसर और सूर्योदय में एक ही समानता है.. देर करने वाले इन्हें खो देते हैं!!
खुद को बदलने का सबसे तेज तरीका है, उन लोगों के साथ रहना जो पहले से ही उस रस्ते पर है जिस पर आप जाना चाहते हैं
परिस्थिति कुछ भी हो डट कर खड़े रहना चाहिए, सही समय आने पर खट्टी कैरी भी बदल कर मीठा आम बन जाती है...
तन की जाने मन की जाने जाने चित्त की चोरी उस मालिक से क्या छुपावे जिसके हाथ है सब की डोर
अपने अंदर से अहंकार को निकालकर स्वयं को हल्का किजिये क्योंकि ऊँचा वही उठता है जो हल्का होता है।
क़दर तो वो होती है जो किसी की मौजूदगी में हो, जो किसी के बाद हो.... उसे पछतावा कहते हैं ।