यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

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एक परवाह ही तो बताती है कि कौन किसका कितना ख्याल रखता है. वरना रिश्तों की गहराइयों को मापने का कोई तराजू नहीं होता है

जब ठोकर खा कर भी ... ना गिरो ... तो समझ लेना... की दुआओं ने थाम रखा है ...!!

रिश्ते भी इमारत की ही तरह होते हैं, हल्की - फुल्की दरारें नज़र आएं तो, ढ़हाइये नहीं मरम्मत कीजिए

जीवन मे पछतावा करना छोडो कुछ ऐसा करो कि लोग तुम्हें छोड़ देने पर पछताए।

चील की ऊँची उड़ान देखकर चिड़िया कभी उदास नही होती वो अपने आस्तित्व में मस्त रहती है मगर इंसान, इंसान की ऊँची उड़ान देखकर बहुत जल्दी चिंता में आ जाते हैं तुलना से बचें और खुश रहें ना किसी से ईर्ष्या, ना किसी से कोई होड़दौड़ मेरी अपनी हैं मंजिलें, मेरी अपनी दौड़

संघर्ष के समय कोई नजदीक नही आता सफलता के बाद किसी को आमंत्रित नही करना पड़ता

एक परवाह ही तो बताती है कि कौन किसका कितना ख्याल रखता है. वरना रिश्तों की गहराइयों को मापने का कोई तराजू नहीं होता है

जब ठोकर खा कर भी ... ना गिरो ... तो समझ लेना... की दुआओं ने थाम रखा है ...!!

रिश्ते भी इमारत की ही तरह होते हैं, हल्की - फुल्की दरारें नज़र आएं तो, ढ़हाइये नहीं मरम्मत कीजिए

जीवन मे पछतावा करना छोडो कुछ ऐसा करो कि लोग तुम्हें छोड़ देने पर पछताए।

चील की ऊँची उड़ान देखकर चिड़िया कभी उदास नही होती वो अपने आस्तित्व में मस्त रहती है मगर इंसान, इंसान की ऊँची उड़ान देखकर बहुत जल्दी चिंता में आ जाते हैं तुलना से बचें और खुश रहें ना किसी से ईर्ष्या, ना किसी से कोई होड़दौड़ मेरी अपनी हैं मंजिलें, मेरी अपनी दौड़

संघर्ष के समय कोई नजदीक नही आता सफलता के बाद किसी को आमंत्रित नही करना पड़ता