त्याग के बिना कुछ भी पाना संभव नही क्योंकि सांस लेने के लिए भी पहले सांस छोड़नी पड़ती है.।
अच्छे जरूर बने लेकिन साबित करने की कोशिश ना करें...
आप वापस नहीं जा सकते है और शुरुवात को नही बदल सकते है, लेकिन जहां है वही से शुरू कर सकते है और अंत को बदल सकते है..
जिसने साथ दिया उसका साथ दो परंतु जिसने त्याग दिया उसे तुम भी त्याग दो
अपने जीवन मे चमत्कार होने का इंतेज़ार मत करो प्रयास करो और खुद एक चमत्कार बन जाओ।
लक्ष्मी चंचल है. प्राण, जीवन, शरीर सब कुछ चंचल और नाशवान हैं. संसार में केवल धर्म ही निश्चल है.
त्याग के बिना कुछ भी पाना संभव नही क्योंकि सांस लेने के लिए भी पहले सांस छोड़नी पड़ती है.।
अच्छे जरूर बने लेकिन साबित करने की कोशिश ना करें...
आप वापस नहीं जा सकते है और शुरुवात को नही बदल सकते है, लेकिन जहां है वही से शुरू कर सकते है और अंत को बदल सकते है..
जिसने साथ दिया उसका साथ दो परंतु जिसने त्याग दिया उसे तुम भी त्याग दो
अपने जीवन मे चमत्कार होने का इंतेज़ार मत करो प्रयास करो और खुद एक चमत्कार बन जाओ।
लक्ष्मी चंचल है. प्राण, जीवन, शरीर सब कुछ चंचल और नाशवान हैं. संसार में केवल धर्म ही निश्चल है.