यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

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जैसे फलों में गंध, तिलों में तेल, काष्ठ में अग्नि, दुग्ध में घी, गन्ने में गुड़ है, उसी तरह शरीर में परमात्मा है. इसे पहचानना चाहिए.

अगर एक हारा हुआ इंसान हारने के बाद भी मुस्करा दे। तो जीतने वाला भी.... जीत की खुशी खो देता है। ये हैं मुस्कान की ताकत...

जीवन मैं एक बार जो फैसला कर लो तो फिर पीछे मुड़कर मत देखना क्योंकि पलट कर देखने वाले इतिहास नहीं बनाते

जो लोग मिली हुई चीज को छोड़कर उस चीज के पीछे भागते है

आप वापस नहीं जा सकते है और शुरुवात को नही बदल सकते है, लेकिन जहां है वही से शुरू कर सकते है और अंत को बदल सकते है..

सलाह के सौ शब्दों से ज्यादा ..! अनुभव की एक ठोकर इंसान को बहुत मजबूत बनाती है ..!!

जैसे फलों में गंध, तिलों में तेल, काष्ठ में अग्नि, दुग्ध में घी, गन्ने में गुड़ है, उसी तरह शरीर में परमात्मा है. इसे पहचानना चाहिए.

अगर एक हारा हुआ इंसान हारने के बाद भी मुस्करा दे। तो जीतने वाला भी.... जीत की खुशी खो देता है। ये हैं मुस्कान की ताकत...

जीवन मैं एक बार जो फैसला कर लो तो फिर पीछे मुड़कर मत देखना क्योंकि पलट कर देखने वाले इतिहास नहीं बनाते

जो लोग मिली हुई चीज को छोड़कर उस चीज के पीछे भागते है

आप वापस नहीं जा सकते है और शुरुवात को नही बदल सकते है, लेकिन जहां है वही से शुरू कर सकते है और अंत को बदल सकते है..

सलाह के सौ शब्दों से ज्यादा ..! अनुभव की एक ठोकर इंसान को बहुत मजबूत बनाती है ..!!