यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

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जब सोच में मोच आती है तब हर रिश्ते में खरोंच आती हैं...

मनुष्य अकेला ही जन्म लेता है, अकेला ही दुःख भोगता है, अकेला ही मोक्ष का अधिकारी होता है और अकेला ही नरक जाता है. अतः रिश्ते-नाते तो क्षण भंगुर हैं, हमें अकेले ही दुनिया के मंच पर अभिनय करना पड़ता है.

हर कल जिंदगी जीने का दूसरा मौका है

किसी का जीवन बदलेगा किसी का 'दिल' बदलेगा, तो.. किसी के 'दिन' बदलेंगे...!

इन्सान बातें वहीं क्लियर करता है जहां उसे रिश्ता रखना हो वरना लोग तो कहते हैं अच्छा हुआ जान छूटी

"निर्मल" रहिए... वरना

जब सोच में मोच आती है तब हर रिश्ते में खरोंच आती हैं...

मनुष्य अकेला ही जन्म लेता है, अकेला ही दुःख भोगता है, अकेला ही मोक्ष का अधिकारी होता है और अकेला ही नरक जाता है. अतः रिश्ते-नाते तो क्षण भंगुर हैं, हमें अकेले ही दुनिया के मंच पर अभिनय करना पड़ता है.

हर कल जिंदगी जीने का दूसरा मौका है

किसी का जीवन बदलेगा किसी का 'दिल' बदलेगा, तो.. किसी के 'दिन' बदलेंगे...!

इन्सान बातें वहीं क्लियर करता है जहां उसे रिश्ता रखना हो वरना लोग तो कहते हैं अच्छा हुआ जान छूटी

"निर्मल" रहिए... वरना