यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

Share:

More Like This

उस मंजिल को पाने के लिए ध्यान केंद्रित करो जिसे आप पाना चाहते हो न कि वर्तमान स्थितियों पर जिसमें आप जी रहे हो।

गुरू केवल आपको शिक्षा दे सकता है उसका उपयोग कैसे करना है ये आपके ऊपर निर्भर करता हैं ।

स्मार्ट बनो क्योंकि कोई भी आपका रिजल्ट देखता है मेहनत नही

जज्बा रखो सच और झूठ को परखने का कानों में जहर घोलना तो जमाने का काम है

खोई चीज अक्सर वही मिल जाती है, जहां वो खोई है, पर विश्वास वहीं नहीं मिलता जहाँ पर खोया गया था

मूर्ख को उपदेश शत्रु के समान लगता है. लोभियों अथवा कंजूसो को याचक (भिखारी) शत्रु सा लगता है. व्यभिचारिणी स्त्री को उसका पति शत्रु लगता है, तो चोरों को चंद्रमा शत्रु लगता है.

उस मंजिल को पाने के लिए ध्यान केंद्रित करो जिसे आप पाना चाहते हो न कि वर्तमान स्थितियों पर जिसमें आप जी रहे हो।

गुरू केवल आपको शिक्षा दे सकता है उसका उपयोग कैसे करना है ये आपके ऊपर निर्भर करता हैं ।

स्मार्ट बनो क्योंकि कोई भी आपका रिजल्ट देखता है मेहनत नही

जज्बा रखो सच और झूठ को परखने का कानों में जहर घोलना तो जमाने का काम है

खोई चीज अक्सर वही मिल जाती है, जहां वो खोई है, पर विश्वास वहीं नहीं मिलता जहाँ पर खोया गया था

मूर्ख को उपदेश शत्रु के समान लगता है. लोभियों अथवा कंजूसो को याचक (भिखारी) शत्रु सा लगता है. व्यभिचारिणी स्त्री को उसका पति शत्रु लगता है, तो चोरों को चंद्रमा शत्रु लगता है.