यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

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परिस्थिति कुछ भी हो डट कर खड़े रहना चाहिए, सही समय आने पर खट्टी कैरी भी बदल कर मीठा आम बन जाती है...

अगर सफल होने का जुनून सर पर है तो मुश्किले आप को नहीं रोक पायेगी .

हम जो सोचते हैं, वो बन जाते हैं

सफलता के लिए सिर्फ कल्पना ही नहीं, सार्थक कर्म भी जरूरी है सीढ़ियों को देखते रहना ही पर्याप्त नहीं है, सीढ़ियों पर चढ़ना भी जरूरी है.

सबको ओढनी है मिट्टी की चादर एक दिन, ऐसा कोई दिया नहीं जिस पर हवा की नजर नहीं

संभालना ही है तो रिश्ते संभालो तस्वीरे तो हर कोई संभाल के रखता है

परिस्थिति कुछ भी हो डट कर खड़े रहना चाहिए, सही समय आने पर खट्टी कैरी भी बदल कर मीठा आम बन जाती है...

अगर सफल होने का जुनून सर पर है तो मुश्किले आप को नहीं रोक पायेगी .

हम जो सोचते हैं, वो बन जाते हैं

सफलता के लिए सिर्फ कल्पना ही नहीं, सार्थक कर्म भी जरूरी है सीढ़ियों को देखते रहना ही पर्याप्त नहीं है, सीढ़ियों पर चढ़ना भी जरूरी है.

सबको ओढनी है मिट्टी की चादर एक दिन, ऐसा कोई दिया नहीं जिस पर हवा की नजर नहीं

संभालना ही है तो रिश्ते संभालो तस्वीरे तो हर कोई संभाल के रखता है