पैदल चलना सेहत के लिए फायदेमंद है लेकिन पैदल पैर से चले दिमाग से नही...
मानव कितनी भी बनावट करे अंधेरे में "छाया" बुढ़ापे में "काया" और अंत समय में "माया" किसी का साथ नहीं देती
प्रत्येक अवसर के लिए तैयार रहना ही सफलता है
किसी का जवाब ना आना भी एक जवाब ही है की अब वो इंसान आपके साथ नही रहना चाहता आप भी समझदारी के साथ फैसला लीजिये और उसे उसके हाल पर छोड़ दीजिए.
जो खैरात में मिलती कामयाबी तो हर शख्स कामयाब होता, फिर कदर न होती किसी हुनर की और न ही कोई शख्स लाजवाब होता
भगवान से निराश कभी मत होना, संसार से आशा कभी मत करना
पैदल चलना सेहत के लिए फायदेमंद है लेकिन पैदल पैर से चले दिमाग से नही...
मानव कितनी भी बनावट करे अंधेरे में "छाया" बुढ़ापे में "काया" और अंत समय में "माया" किसी का साथ नहीं देती
प्रत्येक अवसर के लिए तैयार रहना ही सफलता है
किसी का जवाब ना आना भी एक जवाब ही है की अब वो इंसान आपके साथ नही रहना चाहता आप भी समझदारी के साथ फैसला लीजिये और उसे उसके हाल पर छोड़ दीजिए.
जो खैरात में मिलती कामयाबी तो हर शख्स कामयाब होता, फिर कदर न होती किसी हुनर की और न ही कोई शख्स लाजवाब होता
भगवान से निराश कभी मत होना, संसार से आशा कभी मत करना