यु जमीन पर बैठ कर क्यूँ आसमान देखता है | पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है |

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कोई कितना भी झूठा और कपटी हो आपके साथ आप तब भी सच्चे बने रहिए क्योंकि किसी बीमार को देखकर स्वयं को बीमार कर लेना ये समझदारी नही मूर्खता है..

गलत व्यक्ति कितना भी मीठा बोले, एक दिन आपके लिए "बीमारी" बन जाएगा अच्छा व्यक्ति कितना भी कड़वा लगे, एक दिन "औषधि" बन कर काम आएग

अपनी तुलना दुसरो से ना करे, हर फल का स्वाद अलग अलग होता है

लाख दलदल हो पाँव जमाए रखिये, हाथ खाली ही सही ऊपर उठाये रखिये, कौन कहता है छलनी में पानी रुक नहीं सकता, बर्फ बनने तक हौसला बनाये रखिये

अगर इंसान सच्चा होगा तो सब कुछ अच्छा होगा

जो कर्म करने के बाद भी फल की इच्छा नही करता उसकी मदद करने के लिए तो खुद भगवान को रास्ता बनाना पड़ता है

कोई कितना भी झूठा और कपटी हो आपके साथ आप तब भी सच्चे बने रहिए क्योंकि किसी बीमार को देखकर स्वयं को बीमार कर लेना ये समझदारी नही मूर्खता है..

गलत व्यक्ति कितना भी मीठा बोले, एक दिन आपके लिए "बीमारी" बन जाएगा अच्छा व्यक्ति कितना भी कड़वा लगे, एक दिन "औषधि" बन कर काम आएग

अपनी तुलना दुसरो से ना करे, हर फल का स्वाद अलग अलग होता है

लाख दलदल हो पाँव जमाए रखिये, हाथ खाली ही सही ऊपर उठाये रखिये, कौन कहता है छलनी में पानी रुक नहीं सकता, बर्फ बनने तक हौसला बनाये रखिये

अगर इंसान सच्चा होगा तो सब कुछ अच्छा होगा

जो कर्म करने के बाद भी फल की इच्छा नही करता उसकी मदद करने के लिए तो खुद भगवान को रास्ता बनाना पड़ता है