दिल तो करता हैं की रूठ जाऊँ कभी बच्चों की तरह फिर सोचता हूँ कि मनाएगा कौन….?

दिल तो करता हैं की रूठ जाऊँ कभी बच्चों की तरह फिर सोचता हूँ कि मनाएगा कौन….?

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सुना था हमने दर्द अक्सर बेदर्द लोग देते हैं मगर हमारी दुनिया उजाड़ी है एक मासूम चेहरे ने

इस दुनिया के लोग भी कितने अजीब है ना, सारे खिलौने छोड़ कर जज़बातों से खेलते हैं

नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं, कसूर तो उस चेहरे का है जो सोने नहीं देता !

वो मेरी मोहब्बत है, और मैं सिर्फ उसकी एक आदत !

क्या कहें कुछ नहीं है कहने को, हाय क्या गम मिला है सहने को.

हमें भी शौक था दरिया -ऐ इश्क में तैरने का, एक शख्स ने ऐसा डुबाया कि अभी तक किनारा न मिला.

सुना था हमने दर्द अक्सर बेदर्द लोग देते हैं मगर हमारी दुनिया उजाड़ी है एक मासूम चेहरे ने

इस दुनिया के लोग भी कितने अजीब है ना, सारे खिलौने छोड़ कर जज़बातों से खेलते हैं

नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं, कसूर तो उस चेहरे का है जो सोने नहीं देता !

वो मेरी मोहब्बत है, और मैं सिर्फ उसकी एक आदत !

क्या कहें कुछ नहीं है कहने को, हाय क्या गम मिला है सहने को.

हमें भी शौक था दरिया -ऐ इश्क में तैरने का, एक शख्स ने ऐसा डुबाया कि अभी तक किनारा न मिला.