जब दिल गैरो मैं लग जाए तब अपनों मैं खामिया नजर आने लगती है
आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं.. आंख बरसे तो क्या किया जाए..??
ऐ दिल तू क्यों रोता है, ये दुनिया है यहाँ ऐसा ही होता है.
कभी ये मत सोचना की याद नहीं करते, हम रात की आखिरी और सुबह की पहली सोच हो तुम
हम तो खुशियाँ उधार देने का कारोबार करते हैं साहब, कोई वक़्त पर लौटता नहीं हैं इसलिए घाटे मे है.
कैसे बनाऊँ तेरी यादों से दूरियां .......दो कदम जाकर सौ कदम लौट आती हूँ .......
जब दिल गैरो मैं लग जाए तब अपनों मैं खामिया नजर आने लगती है
आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं.. आंख बरसे तो क्या किया जाए..??
ऐ दिल तू क्यों रोता है, ये दुनिया है यहाँ ऐसा ही होता है.
कभी ये मत सोचना की याद नहीं करते, हम रात की आखिरी और सुबह की पहली सोच हो तुम
हम तो खुशियाँ उधार देने का कारोबार करते हैं साहब, कोई वक़्त पर लौटता नहीं हैं इसलिए घाटे मे है.
कैसे बनाऊँ तेरी यादों से दूरियां .......दो कदम जाकर सौ कदम लौट आती हूँ .......