बड़ी अजीब सी मोहब्बत थी तुम्हारी..पहले पागल किया.. फिर पागल कहा.. और फिर पागल समझ कर छोड़ दिया

बड़ी अजीब सी मोहब्बत थी तुम्हारी..पहले पागल किया.. फिर पागल कहा.. और फिर पागल समझ कर छोड़ दिया

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जिस्म तो फिर भी थक हार के सो जाता है....काश दिल का भी कोई बिस्तर होता.....

मरता था जिनके लिए वो अब मर गए है मेरे लिए.

दास्तां सुनाऊं और मज़ाक़ बन जाऊँ बेहतर है मुस्कुराऊं और ख़ामोश रह जाऊँ

खो कर फिर तुम हमें पा ना सकोगे साहब हम वहाँ मिलेंगे जहाँ तुम आ ना सकोगे

कितने अनमोल होते है, ये यादों के रिश्ते भी, कोई याद ना भी करे, तो चाहत फिर भी रहती है

अब मुझे रास आ गई है तन्हाइयाँ... आप अपने वक़्त का अचार डाल लिजिये

जिस्म तो फिर भी थक हार के सो जाता है....काश दिल का भी कोई बिस्तर होता.....

मरता था जिनके लिए वो अब मर गए है मेरे लिए.

दास्तां सुनाऊं और मज़ाक़ बन जाऊँ बेहतर है मुस्कुराऊं और ख़ामोश रह जाऊँ

खो कर फिर तुम हमें पा ना सकोगे साहब हम वहाँ मिलेंगे जहाँ तुम आ ना सकोगे

कितने अनमोल होते है, ये यादों के रिश्ते भी, कोई याद ना भी करे, तो चाहत फिर भी रहती है

अब मुझे रास आ गई है तन्हाइयाँ... आप अपने वक़्त का अचार डाल लिजिये