मरता था जिनके लिए वो अब मर गए है मेरे लिए.

मरता था जिनके लिए वो अब मर गए है मेरे लिए.

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तेरे इश्क ने सरकारी दफ्तर बना दिया दिल को, ना कोई काम करता है, ना कोई बात सुनता है .....

बिछड़ कर फिर मिलेंगे यकींन कितना था, था तो ख्वाब, मगर हसीन कितना था |

उस हंसती हुई तस्वीर को क्या मालूम की कोई उसे देख कितने रोता है

एक घुटन सी होती है जीने में जब कोई दिल में तो रहता है पर साथ नहीं

यकीनन हो रही होंगी बैचेनियां तुम्हें भी, ये और बात है कि तुम नजरअंदाज कर रहे हो...

जिन्हें नींद नहीं आती उन्हीं को मालूम है सुबह आने में कितने जमाने लगते हैं

तेरे इश्क ने सरकारी दफ्तर बना दिया दिल को, ना कोई काम करता है, ना कोई बात सुनता है .....

बिछड़ कर फिर मिलेंगे यकींन कितना था, था तो ख्वाब, मगर हसीन कितना था |

उस हंसती हुई तस्वीर को क्या मालूम की कोई उसे देख कितने रोता है

एक घुटन सी होती है जीने में जब कोई दिल में तो रहता है पर साथ नहीं

यकीनन हो रही होंगी बैचेनियां तुम्हें भी, ये और बात है कि तुम नजरअंदाज कर रहे हो...

जिन्हें नींद नहीं आती उन्हीं को मालूम है सुबह आने में कितने जमाने लगते हैं