ज़िंदगी को आसान नहीं बस खुद को मजबूत बनाना पड़ता है
ब्राह्मण, गुरु, अग्नि, कुंवारी कन्या, बालक, और वृद्धों को पेरो से नहीं छूना चाहिए. ये सभी आदरणीय है. हमें इन्हें आदर-सम्मान देना चाहिए.
जीत की आदत अच्छी है, मगर कुछ रिश्तों में हार जाना बेहतर है
इतने दर्द के बाद भी मुस्कुरा रहा हूँ ए ज़िंदगी देख तुझे कैसे हरा रहा हूँ मैं
कुछ भी "कर्म करो" हमेशा एक बात ध्यान रखो की “परमात्मा" Online है
पीछे मुड़कर देखने मे कोई समझदारी नही है जबकि आपके पास आगे देखने के लिए बहुत कुछ है
ज़िंदगी को आसान नहीं बस खुद को मजबूत बनाना पड़ता है
ब्राह्मण, गुरु, अग्नि, कुंवारी कन्या, बालक, और वृद्धों को पेरो से नहीं छूना चाहिए. ये सभी आदरणीय है. हमें इन्हें आदर-सम्मान देना चाहिए.
जीत की आदत अच्छी है, मगर कुछ रिश्तों में हार जाना बेहतर है
इतने दर्द के बाद भी मुस्कुरा रहा हूँ ए ज़िंदगी देख तुझे कैसे हरा रहा हूँ मैं
कुछ भी "कर्म करो" हमेशा एक बात ध्यान रखो की “परमात्मा" Online है
पीछे मुड़कर देखने मे कोई समझदारी नही है जबकि आपके पास आगे देखने के लिए बहुत कुछ है