"काम वही करना 'ठीक' है, जिससे करके 'पछताना' ना पड़े..."

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हुनर होगा तो दुनिया खुद कदर करेगी एडियाँ उठाने से किरदार ऊँचे नही होते

अपने आप को हर परिश्थिति में शांत रहने के लिए तैयार करे.

एक रंग रिश्तों पर ऐसा लगाए भीगे हर शब्द पर अर्थ बहने न पाए ।

वक्त बदलने से उतनी तकलीफ़ नहीं होती. जितनी किसी अपने के बदल जाने से होती है..

देर से बनो मगर जरूर कुछ बनो क्योकि वक़्त के साथ लोग खेरियत नहीं हैसियत पूछते है

दान से ही हाथों कि सुन्दरता है न कि कंगन पहनने से. शरीर स्नान से शुद्ध होता है न कि चन्दन लगाने से. तृप्ति मान से होती है न कि भोजन से. मोक्ष ज्ञान से मिलता है न कि श्रृंगार से|

हुनर होगा तो दुनिया खुद कदर करेगी एडियाँ उठाने से किरदार ऊँचे नही होते

अपने आप को हर परिश्थिति में शांत रहने के लिए तैयार करे.

एक रंग रिश्तों पर ऐसा लगाए भीगे हर शब्द पर अर्थ बहने न पाए ।

वक्त बदलने से उतनी तकलीफ़ नहीं होती. जितनी किसी अपने के बदल जाने से होती है..

देर से बनो मगर जरूर कुछ बनो क्योकि वक़्त के साथ लोग खेरियत नहीं हैसियत पूछते है

दान से ही हाथों कि सुन्दरता है न कि कंगन पहनने से. शरीर स्नान से शुद्ध होता है न कि चन्दन लगाने से. तृप्ति मान से होती है न कि भोजन से. मोक्ष ज्ञान से मिलता है न कि श्रृंगार से|