इत्र से कपड़ो का महकना कोई बड़ी बात नही, मजा तो तब है जब आपके किरदार में खुशबू महके।
विषहीन सर्प को भी अपनी रक्षा के लिए फन फैलाना पड़ता है. (इसलिए शक्तिशाली न होते हुए भी शक्तिशाली होने का दिखावा करना आपकी रक्षा करता है.)
ज़िंदगी में समस्या देने वाले की हस्ती कितनी भी बड़ी क्यों न हो.... पर भगवान की "कृपादृष्टि" से बड़ी नहीं हो सकती!!
रिश्ता रखो तो सच्चा नही तो अलविदा ही अच्छा
उस मनुष्य की ताकत का कोई मुकाबला नही कर सकता जिसके पास सब्र की ताकत है
...किसी ने क्या खूब लिखा है "वक़्त" निकालकर "बाते" कर लिया करो "अपनों से" अगर "अपने ही" न रहेंगे तो "वक़्त" का क्या करोगे....!"
इत्र से कपड़ो का महकना कोई बड़ी बात नही, मजा तो तब है जब आपके किरदार में खुशबू महके।
विषहीन सर्प को भी अपनी रक्षा के लिए फन फैलाना पड़ता है. (इसलिए शक्तिशाली न होते हुए भी शक्तिशाली होने का दिखावा करना आपकी रक्षा करता है.)
ज़िंदगी में समस्या देने वाले की हस्ती कितनी भी बड़ी क्यों न हो.... पर भगवान की "कृपादृष्टि" से बड़ी नहीं हो सकती!!
रिश्ता रखो तो सच्चा नही तो अलविदा ही अच्छा
उस मनुष्य की ताकत का कोई मुकाबला नही कर सकता जिसके पास सब्र की ताकत है
...किसी ने क्या खूब लिखा है "वक़्त" निकालकर "बाते" कर लिया करो "अपनों से" अगर "अपने ही" न रहेंगे तो "वक़्त" का क्या करोगे....!"