" समय " और " शब्द ' दोनों का उपयोग " लापरवाही " से ना करें क्योंकि ये " दोनों " ना दुबारा आते हैं ना " मौका " देते है !
कोई किसी को सिखा नही सकता जब खुद में इच्छा जागती है तभी कोई सिख पाता है
अगर ज़िन्दगी में सुकून चाहते हो तो लोगों की बातों को दिल से लगाना छोड़ दो
जो बुरे वक्त में आपकी कमियां गिनाने लग जाए उससे बड़ा मतलबी इंसान कोई नही है.
काश ! कि मैंने उस चीज को पाने की कभी तमन्ना ना की होती जिंदगी में, जिसे पाने की ना औकात है मेरी , ना तकदीर से हकदार हूँ मैं उस चीज का....
रिश्तो की सिलाई अगर भावनाओ से हुई है तो टूटना मुश्किल है और अगर स्वार्थ से हुई है, तो टिकना मुश्किल है.
" समय " और " शब्द ' दोनों का उपयोग " लापरवाही " से ना करें क्योंकि ये " दोनों " ना दुबारा आते हैं ना " मौका " देते है !
कोई किसी को सिखा नही सकता जब खुद में इच्छा जागती है तभी कोई सिख पाता है
अगर ज़िन्दगी में सुकून चाहते हो तो लोगों की बातों को दिल से लगाना छोड़ दो
जो बुरे वक्त में आपकी कमियां गिनाने लग जाए उससे बड़ा मतलबी इंसान कोई नही है.
काश ! कि मैंने उस चीज को पाने की कभी तमन्ना ना की होती जिंदगी में, जिसे पाने की ना औकात है मेरी , ना तकदीर से हकदार हूँ मैं उस चीज का....
रिश्तो की सिलाई अगर भावनाओ से हुई है तो टूटना मुश्किल है और अगर स्वार्थ से हुई है, तो टिकना मुश्किल है.