इन्सान बातें वहीं क्लियर करता है जहां उसे रिश्ता रखना हो वरना लोग तो कहते हैं अच्छा हुआ जान छूटी
अगर कोई पसंद आ जाए तो दूसरों से नहीं पूछना चाहिए वो कैसा है
अगर परमात्मा तुम्हे कष्ट के पास ले आया तो अवश्य ही वो तुम्हे कष्ट के पार भी ले जाएगा
जब रिश्तों में झूठ बोलने की आवश्यकता महसूस होने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि रिश्ता समाप्ति की ओर है
"संसार में ऐसी कोई भी समस्या नहीं है जो आपके मन की शक्ति से अधिक शक्तिशाली हो
दुनिया वो किताब हैं जो कभी नहीं पड़ी जा सकती लेकिन ज़माना वो उस्ताद हैं जो सब कुछ सिखा देता हैं
इन्सान बातें वहीं क्लियर करता है जहां उसे रिश्ता रखना हो वरना लोग तो कहते हैं अच्छा हुआ जान छूटी
अगर कोई पसंद आ जाए तो दूसरों से नहीं पूछना चाहिए वो कैसा है
अगर परमात्मा तुम्हे कष्ट के पास ले आया तो अवश्य ही वो तुम्हे कष्ट के पार भी ले जाएगा
जब रिश्तों में झूठ बोलने की आवश्यकता महसूस होने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि रिश्ता समाप्ति की ओर है
"संसार में ऐसी कोई भी समस्या नहीं है जो आपके मन की शक्ति से अधिक शक्तिशाली हो
दुनिया वो किताब हैं जो कभी नहीं पड़ी जा सकती लेकिन ज़माना वो उस्ताद हैं जो सब कुछ सिखा देता हैं