महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है
तेरे पास जो है उसकी कदर कर, यहां आसमान के पास भी खुद की ज़मीं नहीं
जीवन वो फूल है, जिसमें कांटे तो बहुत है, मगर सौन्दर्य की भी कोई कमी नहीं
अगर इंसान सच्चा होगा तो सब कुछ अच्छा होगा
तन की जाने मन की जाने जाने चित्त की चोरी उस मालिक से क्या छुपावे जिसके हाथ है सब की डोर
कर्म करो तो फल मिलता है, आज नहीं तो कल मिलता है जितना गहरा अधिक हो कुआँ, उतना मीठा जल मिलता है।
महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है
तेरे पास जो है उसकी कदर कर, यहां आसमान के पास भी खुद की ज़मीं नहीं
जीवन वो फूल है, जिसमें कांटे तो बहुत है, मगर सौन्दर्य की भी कोई कमी नहीं
अगर इंसान सच्चा होगा तो सब कुछ अच्छा होगा
तन की जाने मन की जाने जाने चित्त की चोरी उस मालिक से क्या छुपावे जिसके हाथ है सब की डोर
कर्म करो तो फल मिलता है, आज नहीं तो कल मिलता है जितना गहरा अधिक हो कुआँ, उतना मीठा जल मिलता है।