मनुष्य की वाणी ही विष और अमृत की खान है।
दुनिया मे अधिक गम है उन सबको देखते हुए आपका बहुत कम है
प्रत्येक "इन्सान" अपनी जुबान के पीछे छुपा होता है, अगर उसे समझना चाहते हो तो उसको बोलने दो.
तकदीर बदल जाती है जब ज़िन्दगी का कोई मकसद हो, वरना उम्र कट जाती है तकदीर को इल्जाम देते देते
कपड़े और चेहरे अक्सर जुठ बोलते है इंसान की असलियत तो वक़्त ही बताता है
मन में उतरना और मन से उतरना केवल आपके व्यवहार पर निर्भर करता है
मनुष्य की वाणी ही विष और अमृत की खान है।
दुनिया मे अधिक गम है उन सबको देखते हुए आपका बहुत कम है
प्रत्येक "इन्सान" अपनी जुबान के पीछे छुपा होता है, अगर उसे समझना चाहते हो तो उसको बोलने दो.
तकदीर बदल जाती है जब ज़िन्दगी का कोई मकसद हो, वरना उम्र कट जाती है तकदीर को इल्जाम देते देते
कपड़े और चेहरे अक्सर जुठ बोलते है इंसान की असलियत तो वक़्त ही बताता है
मन में उतरना और मन से उतरना केवल आपके व्यवहार पर निर्भर करता है