जब गलत "पासवर्ड" से एक छोटा सा "मोबाइल" नहीं खुलता तो गलत "कामों" से "जन्नत" के "दरवाजे" कैसे खुलेंगे|

जब गलत "पासवर्ड" से एक छोटा सा "मोबाइल" नहीं खुलता तो गलत "कामों" से "जन्नत" के "दरवाजे" कैसे खुलेंगे|

Share:

More Like This

निखरती है मुसीबतों से शख्शियत यारो..जो चट्टान से ही ना उलझे वो झरना किस काम का

खिचड़ी अगर बर्तन में पके तो बीमार को ठीक कर देती है और यदि दिमाग में पके तो इंसान को बीमार कर देती है

ज्ञान से बढ़कर कोई दूसरा गुरु नहीं, काम-वासना के समान कोई दूसरा रोग नहीं, क्रोध के समान कोई आग नहीं और अज्ञानता के जैसा शत्रु कोई नहीं.

हौसले जिनके चट्टान हुआ करते हैं रास्ते उनके ही आसान हुआ करते हैं ए नादान न घबरा इन परेशानियों से ये तो पल भर के मेहमान हुआ करते हैं!

आमदनी कम हो तो "ख़र्चों" पर क़ाबू रखिए जानकारी कम हो तो "लफ़्ज़ों" पर क़ाबू रखिए

परेशानियां हमारी कमजोरियां साबित नही करती बल्कि यह बताती है कि हमे और

निखरती है मुसीबतों से शख्शियत यारो..जो चट्टान से ही ना उलझे वो झरना किस काम का

खिचड़ी अगर बर्तन में पके तो बीमार को ठीक कर देती है और यदि दिमाग में पके तो इंसान को बीमार कर देती है

ज्ञान से बढ़कर कोई दूसरा गुरु नहीं, काम-वासना के समान कोई दूसरा रोग नहीं, क्रोध के समान कोई आग नहीं और अज्ञानता के जैसा शत्रु कोई नहीं.

हौसले जिनके चट्टान हुआ करते हैं रास्ते उनके ही आसान हुआ करते हैं ए नादान न घबरा इन परेशानियों से ये तो पल भर के मेहमान हुआ करते हैं!

आमदनी कम हो तो "ख़र्चों" पर क़ाबू रखिए जानकारी कम हो तो "लफ़्ज़ों" पर क़ाबू रखिए

परेशानियां हमारी कमजोरियां साबित नही करती बल्कि यह बताती है कि हमे और