आजादी अच्छी चीज है, लेकिन ? कबूतर को ? आजाद कराने के लिए पिजरे का दरवाजा बिल्ली खोले तो समझदारी पिंजरे में रहने में ही है..!!
व्यक्ति के आचरण से उसके कुल का परिचय मिलता है. बोली से देश का पता लगता है. आदर-सत्कार से प्रेम का और शरीर से व्यक्ति के भोजन का पता लगता है.
हमेशा अपनी "बात" कहनें का अन्दाज खूबसूरत रखो.... ताकि "जवाब" भीं खूबसूरत सुन सको.. प्रेम की धारा, बहती है जिस दिल में, चर्चा उसकी होती है, हर महफ़िल में.
जब ठोकर खा कर भी ... ना गिरो ... तो समझ लेना... की दुआओं ने थाम रखा है ...!!
थोड़ा सा अभ्यास बहुत सारे उपदेशों से बेहतर है
समझदार वही है जो फूँक-फूँक कर कदम रखे, पानी को छानकर पिए, शास्त्रानुसार वाक्य बोले और सोच-विचार कर कर्म करे. इस तरह किए गए कार्य में सफलता अवश्य मिलती है .
आजादी अच्छी चीज है, लेकिन ? कबूतर को ? आजाद कराने के लिए पिजरे का दरवाजा बिल्ली खोले तो समझदारी पिंजरे में रहने में ही है..!!
व्यक्ति के आचरण से उसके कुल का परिचय मिलता है. बोली से देश का पता लगता है. आदर-सत्कार से प्रेम का और शरीर से व्यक्ति के भोजन का पता लगता है.
हमेशा अपनी "बात" कहनें का अन्दाज खूबसूरत रखो.... ताकि "जवाब" भीं खूबसूरत सुन सको.. प्रेम की धारा, बहती है जिस दिल में, चर्चा उसकी होती है, हर महफ़िल में.
जब ठोकर खा कर भी ... ना गिरो ... तो समझ लेना... की दुआओं ने थाम रखा है ...!!
थोड़ा सा अभ्यास बहुत सारे उपदेशों से बेहतर है
समझदार वही है जो फूँक-फूँक कर कदम रखे, पानी को छानकर पिए, शास्त्रानुसार वाक्य बोले और सोच-विचार कर कर्म करे. इस तरह किए गए कार्य में सफलता अवश्य मिलती है .