वाकिफ तो मैं भी हूँ दुनिया के तौर-तरीको से, पर जिद्द तो यहाँ अपने हिसाब से जीने की है..

वाकिफ तो मैं भी हूँ दुनिया के तौर-तरीको से, पर जिद्द तो यहाँ अपने हिसाब से जीने की है..

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मोहबत है इसलिए जाने दिया …. ज़िद होती तो बाहों में ले लेते।

सच है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका बात करने का तरीका भी बदल जाता है

रिश्तो को वक़्त और हालत बदल देते है अब तेरा ज़िकर होने पर हम बात बदल देते है

माफ़ी गल्तियों की होती है ..धोखे की नहीं

शायद कुछ लोग भूल गए है अपनी औक़ात लगता है फिर मैदान में आना पड़ेगा

ज़िंदगी की रेस में जो लोग आपको दौड़ कर नहीं हरा पाते..!! वही आपको तोड़ कर हारने की कोशिश करते है ..!!

मोहबत है इसलिए जाने दिया …. ज़िद होती तो बाहों में ले लेते।

सच है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका बात करने का तरीका भी बदल जाता है

रिश्तो को वक़्त और हालत बदल देते है अब तेरा ज़िकर होने पर हम बात बदल देते है

माफ़ी गल्तियों की होती है ..धोखे की नहीं

शायद कुछ लोग भूल गए है अपनी औक़ात लगता है फिर मैदान में आना पड़ेगा

ज़िंदगी की रेस में जो लोग आपको दौड़ कर नहीं हरा पाते..!! वही आपको तोड़ कर हारने की कोशिश करते है ..!!