पैदल चलना सेहत के लिए फायदेमंद है लेकिन पैदल पैर से चले दिमाग से नही...
ईश्वर ना काष्ठ में है, न मिट्टी में, न ही मूर्ति में. वह केवल भावना में होता है. अतः भावना ही मुख्य है.
सोच खूबसूरत हो तो सब कुछ अच्छा नजर आता है
किसी के आगे हाथ फैलाने से अच्छा अपने हाथों को काम मे लगा दो
"हर इंसान में कुछ न कुछ प्रतिभा होती है लेकिन अक्सर लोग इसे दूसरों के जैसा बनने में नष्ट कर देते हैं"
अभिमान मत करो कि मुझे किसी की ज़रूरत नही आत्मनिर्भर बनो की में कर सकता हु हर चीज़ पर वहम भी नही की मेरे बिना कुछ हो नही सकता
पैदल चलना सेहत के लिए फायदेमंद है लेकिन पैदल पैर से चले दिमाग से नही...
ईश्वर ना काष्ठ में है, न मिट्टी में, न ही मूर्ति में. वह केवल भावना में होता है. अतः भावना ही मुख्य है.
सोच खूबसूरत हो तो सब कुछ अच्छा नजर आता है
किसी के आगे हाथ फैलाने से अच्छा अपने हाथों को काम मे लगा दो
"हर इंसान में कुछ न कुछ प्रतिभा होती है लेकिन अक्सर लोग इसे दूसरों के जैसा बनने में नष्ट कर देते हैं"
अभिमान मत करो कि मुझे किसी की ज़रूरत नही आत्मनिर्भर बनो की में कर सकता हु हर चीज़ पर वहम भी नही की मेरे बिना कुछ हो नही सकता