तब तक मेहनत करते रहो जब तक आपको अपना परिचय खुद किसी को देने की जरूरत ना पड़े
सबसे बेहतरीन नजऱ वो है, जो अपनी कमियों को देख सके।
अधर्म बुद्धि से आत्मविनाश की सुचना मिलती है।
कुछ पाने के लिए कुछ खोना नहीं..कुछ करना पड़ता है
लोग आपकी कदर तभी करेंगे जब आप उनको उन्ही की तरह अनदेखा करना सीख जाओगे
ब्राह्मण, गुरु, अग्नि, कुंवारी कन्या, बालक, और वृद्धों को पेरो से नहीं छूना चाहिए. ये सभी आदरणीय है. हमें इन्हें आदर-सम्मान देना चाहिए.
तब तक मेहनत करते रहो जब तक आपको अपना परिचय खुद किसी को देने की जरूरत ना पड़े
सबसे बेहतरीन नजऱ वो है, जो अपनी कमियों को देख सके।
अधर्म बुद्धि से आत्मविनाश की सुचना मिलती है।
कुछ पाने के लिए कुछ खोना नहीं..कुछ करना पड़ता है
लोग आपकी कदर तभी करेंगे जब आप उनको उन्ही की तरह अनदेखा करना सीख जाओगे
ब्राह्मण, गुरु, अग्नि, कुंवारी कन्या, बालक, और वृद्धों को पेरो से नहीं छूना चाहिए. ये सभी आदरणीय है. हमें इन्हें आदर-सम्मान देना चाहिए.