खूबी और खामी दोनो ही होती है लोगों में आप क्या तलाशते हो ये महत्वपूर्ण है
खुद से बहस करोगे तो सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे, अगर दुसरो से करोगे तो और नये सवाल खड़े हो जायेंगे, जब मनुष्य अपनी ग़लती का वक़ील और दूसरों की गलतियों का, जज बन जाता है तो फैसले नही फासले हो जाते है..
घमंड ना करो अपने रूप और रुपए का मोर को उसके पंखों का भोज ऊँचा उड़ने नही देता
अगर वाकई में तुमको कामयाब होना है तो अपने बीते कल में जीना छोड़ दो
मेरी मंजिल मेरे करीब है इसका मुझे एहसास है घमण्ड नहीं मुझे अपने इरादों पर ये मेरी सोच और हौसले का विश्वास है
मुस्कुराहटें झूठी भी हो सकती है.. इंसान को देखना नही समझना सीखो
खूबी और खामी दोनो ही होती है लोगों में आप क्या तलाशते हो ये महत्वपूर्ण है
खुद से बहस करोगे तो सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे, अगर दुसरो से करोगे तो और नये सवाल खड़े हो जायेंगे, जब मनुष्य अपनी ग़लती का वक़ील और दूसरों की गलतियों का, जज बन जाता है तो फैसले नही फासले हो जाते है..
घमंड ना करो अपने रूप और रुपए का मोर को उसके पंखों का भोज ऊँचा उड़ने नही देता
अगर वाकई में तुमको कामयाब होना है तो अपने बीते कल में जीना छोड़ दो
मेरी मंजिल मेरे करीब है इसका मुझे एहसास है घमण्ड नहीं मुझे अपने इरादों पर ये मेरी सोच और हौसले का विश्वास है
मुस्कुराहटें झूठी भी हो सकती है.. इंसान को देखना नही समझना सीखो