पिता की दौलत पर क्या घमंड करना मजा तो तब है जब दौलत अपनी हो और पिता घमंड करे|

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सुख भी बहुत है परेशानियां भी बहुत है जिंदगी में लाभ है तो हानियां भी बहुत है क्या हुआ जो भगवान ने थोड़े गम दे दिए भगवान की हम पर मेहरबानियां भी बहुत है!

अपेक्षाएं जहां खत्म होती हैं, सुकून वहीं से शुरू होता है

कश्ती भी नहीं बदली दरिया भी नहीं बदला पर हम डूबने वालो का जज़्बा भी नहीं बदला है शौक-ए-सफ़र ऐसा, कि एक उम्र से हमने मंज़िल भी नहीं पायी और रस्ता भी नहीं बदला

हौसले जिनके चट्टान हुआ करते हैं रास्ते उनके ही आसान हुआ करते हैं ए नादान न घबरा इन परेशानियों से ये तो पल भर के मेहमान हुआ करते हैं

चिंता उतनी करो की काम हो जाये..इतनी नही की ज़िन्दगी तमाम हो जाये

सुख दुख तो अतिथि है, बारी बारी से आएंगे, चले जाएंगे यदि वह नहीं आएंगे तो, हम अनुभव कहां से लाएंगे

सुख भी बहुत है परेशानियां भी बहुत है जिंदगी में लाभ है तो हानियां भी बहुत है क्या हुआ जो भगवान ने थोड़े गम दे दिए भगवान की हम पर मेहरबानियां भी बहुत है!

अपेक्षाएं जहां खत्म होती हैं, सुकून वहीं से शुरू होता है

कश्ती भी नहीं बदली दरिया भी नहीं बदला पर हम डूबने वालो का जज़्बा भी नहीं बदला है शौक-ए-सफ़र ऐसा, कि एक उम्र से हमने मंज़िल भी नहीं पायी और रस्ता भी नहीं बदला

हौसले जिनके चट्टान हुआ करते हैं रास्ते उनके ही आसान हुआ करते हैं ए नादान न घबरा इन परेशानियों से ये तो पल भर के मेहमान हुआ करते हैं

चिंता उतनी करो की काम हो जाये..इतनी नही की ज़िन्दगी तमाम हो जाये

सुख दुख तो अतिथि है, बारी बारी से आएंगे, चले जाएंगे यदि वह नहीं आएंगे तो, हम अनुभव कहां से लाएंगे