ज़िन्दगी गुजारने लगी है अब किश्तों पर.. ये कुछ ग्राम का मोबाइल भारी पड़ गया है रिश्तों पर...

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कदर करना सिख लो क्योंकि.. ना ही ज़िंदगी वापिस आती है और ना ही लोग..

कुछ तो है तुझसे मेरा रिश्ता वर्ण कोई गैर इतना भी याद नहीं आता

मेरी याद क़यामत की तरह है एक दिन ज़रूर आएगी

मेरे ग़म को कोई नहीं समझ सका क्यों के मुझे आदत थी मुस्कराने की

मुस्कुराना तो सीखना पड़ता हैं, रोना तो लोग सीखा देते हैं..

ज़िन्दगी में कुछ लोग ऐसे भी आते हैं हँसाते – रूलाते और देखते ही देखते दिल में बस जाते हैं फिर दूर जाने के बाद याद बहुत आते हैं ..

कदर करना सिख लो क्योंकि.. ना ही ज़िंदगी वापिस आती है और ना ही लोग..

कुछ तो है तुझसे मेरा रिश्ता वर्ण कोई गैर इतना भी याद नहीं आता

मेरी याद क़यामत की तरह है एक दिन ज़रूर आएगी

मेरे ग़म को कोई नहीं समझ सका क्यों के मुझे आदत थी मुस्कराने की

मुस्कुराना तो सीखना पड़ता हैं, रोना तो लोग सीखा देते हैं..

ज़िन्दगी में कुछ लोग ऐसे भी आते हैं हँसाते – रूलाते और देखते ही देखते दिल में बस जाते हैं फिर दूर जाने के बाद याद बहुत आते हैं ..