युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे…पता नही था की, ‘किमत चेहरों की होती है’ !
मेरे दिल से खेल तो रहे हो तुम पर...... जरा सम्भल के...... ये थोडा टूटा हुआ है कहीं तुम्हे ही लग ना जाए
हमे पता है की तुम कहीं और के मुसाफिर हो, हमारा शहर तो यूँ ही बिच में आया था
मेरे मरने पर तो लाखो रोने वाले है, तलाश उसकी है जो मेरे रोने से मर जाए
उसे गजब का शौंक है हरियाली का, रोज आकर जख्मों को हरा कर जाती है
तुम मोहबत भी मौसम की तरह निभाते हो, कभी बरसते हो कभी एक बूंद को तरसाते हो
युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे…पता नही था की, ‘किमत चेहरों की होती है’ !
मेरे दिल से खेल तो रहे हो तुम पर...... जरा सम्भल के...... ये थोडा टूटा हुआ है कहीं तुम्हे ही लग ना जाए
हमे पता है की तुम कहीं और के मुसाफिर हो, हमारा शहर तो यूँ ही बिच में आया था
मेरे मरने पर तो लाखो रोने वाले है, तलाश उसकी है जो मेरे रोने से मर जाए
उसे गजब का शौंक है हरियाली का, रोज आकर जख्मों को हरा कर जाती है
तुम मोहबत भी मौसम की तरह निभाते हो, कभी बरसते हो कभी एक बूंद को तरसाते हो