तमाशा बन गयी है ज़िन्दगी कुछ कहे तो भी बुरे और कुछ न कहे तो भी बुरे
उम्र कैद की तरह होते हे कुछ रिश्ते ,, जहा जमानत देकर भी रिहाई मुमकिन नही
चलते रहेंगे क़ाफ़िले मेरे बग़ैर भी यहाँ.एक तारा टूट जाने से, फ़लक़ सूना नहीं होता
मैंने दोस्ती माँगी थी वो इश्क़ देकर बर्बाद कर गया
हम नादान थे जो उसे हमसफ़र समझ बैठे जो चलती थी साथ मेरे पर तलाश उसे किसी और की थी
कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!
तमाशा बन गयी है ज़िन्दगी कुछ कहे तो भी बुरे और कुछ न कहे तो भी बुरे
उम्र कैद की तरह होते हे कुछ रिश्ते ,, जहा जमानत देकर भी रिहाई मुमकिन नही
चलते रहेंगे क़ाफ़िले मेरे बग़ैर भी यहाँ.एक तारा टूट जाने से, फ़लक़ सूना नहीं होता
मैंने दोस्ती माँगी थी वो इश्क़ देकर बर्बाद कर गया
हम नादान थे जो उसे हमसफ़र समझ बैठे जो चलती थी साथ मेरे पर तलाश उसे किसी और की थी
कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!