ज़िन्दगी गुजारने लगी है अब किश्तों पर.. ये कुछ ग्राम का मोबाइल भारी पड़ गया है रिश्तों पर...

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खामोश रहना ही बेहतर है लफ्ज़ो के अक्सर लोग गलत मतलब निकाल लेते है.

इंसान अपने कर्म से बड़ा होता है, अपने जन्म से नहीं .

तुम जो साथ हो तो दुनिया अपनी सी लगती है वरना सीने में सांस भी पराई लगती है

मायने खो देते हैं वो जवाब, जो वक्त पर नहीं मिलते !!

तेरी नाराज़गी वाजिब है दोस्त.. मैं भी खुद से खुश नहीं हूं आजकल...

मुझमें ही हौसला नहीं वरना .. छत का पंखा पुकारता है मुझे....

खामोश रहना ही बेहतर है लफ्ज़ो के अक्सर लोग गलत मतलब निकाल लेते है.

इंसान अपने कर्म से बड़ा होता है, अपने जन्म से नहीं .

तुम जो साथ हो तो दुनिया अपनी सी लगती है वरना सीने में सांस भी पराई लगती है

मायने खो देते हैं वो जवाब, जो वक्त पर नहीं मिलते !!

तेरी नाराज़गी वाजिब है दोस्त.. मैं भी खुद से खुश नहीं हूं आजकल...

मुझमें ही हौसला नहीं वरना .. छत का पंखा पुकारता है मुझे....