ज़िन्दगी गुजारने लगी है अब किश्तों पर.. ये कुछ ग्राम का मोबाइल भारी पड़ गया है रिश्तों पर...

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तुम बेवफा नही मगर इतना ज़रूर हैं तुम पहले जैसे थे अब वैसे नही रहे

कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!

बड़ी अजीब सी हैं शहरों की रौशनी.. उजालो के बावजूद चेहरे पहचानना मुश्किल हैं..

होने वाले ख़ुद ही अपने हो जाते हैं.. किसी को कहकर, अपना बनाया नही जाता..!!

मौत आये तो शायद दिन सवर जाए वरना ज़िंदगी ने तो मार ही डाला है

तुमसे दिल लगा कर देख लिया अब और क्या देखने को बाक़ी है |

तुम बेवफा नही मगर इतना ज़रूर हैं तुम पहले जैसे थे अब वैसे नही रहे

कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!

बड़ी अजीब सी हैं शहरों की रौशनी.. उजालो के बावजूद चेहरे पहचानना मुश्किल हैं..

होने वाले ख़ुद ही अपने हो जाते हैं.. किसी को कहकर, अपना बनाया नही जाता..!!

मौत आये तो शायद दिन सवर जाए वरना ज़िंदगी ने तो मार ही डाला है

तुमसे दिल लगा कर देख लिया अब और क्या देखने को बाक़ी है |