ओ सर्दियों की मनमोहिनी धूप तेरा शुक्रिया हे सूर्य नारायण तेरा शुक्रिया ओ ठिठुरन से मुक्ति दिलाने वाले तेरा शुक्रिया शक्ति के संचारी तेरा शुक्रिया तुमसे ही तो ठंडे पड़े रिश्तो में गरमाहट आयी हे गरमाहट के देव तेरा शुक्रिया सौंधी सौंधी धूप में छिटपुट खेलो के लिए शुक्रिया हे जगदीश्वर तेरा शुक्रिया
सिर्फ इशारों में होती महोब्बत अगर, इन अलफाजों को खुबसूरती कौन देता बस पत्थर बन के रह जाता ‘ताज महल’ अगर इश्क इसे अपनी पहचान ना देता
गुलदस्ता मेरे हाथ में चेहरे पर मुस्कान ऐ जाने वाले रखना अपना ध्यान ..
मैं तो कांच का टुकड़ा था तुमने ही हीरा बनाया, कैसे शुक्रिया अदा करूँ तूने जो जीना सिखा दिया.
बात ऐसी हो की जज़्बात कम ना हो खयालात ऐसे हों की कभी ग़म ना हो दिल के कोने में इतनी सी जगह रखना की खाली – खाली सा लगे जब हम ना हों ..
किस तरह से शुक्रिया कहें आपको, ज़मीन से उठा कर दिल में बिठा लिया, नज़रों में समां कर, पलकों पे सजा दिया, इतना प्यार दिया आपने हमको, कि मेरे बिखरे शब्दों को कविता बना दिया… Thank You
ओ सर्दियों की मनमोहिनी धूप तेरा शुक्रिया हे सूर्य नारायण तेरा शुक्रिया ओ ठिठुरन से मुक्ति दिलाने वाले तेरा शुक्रिया शक्ति के संचारी तेरा शुक्रिया तुमसे ही तो ठंडे पड़े रिश्तो में गरमाहट आयी हे गरमाहट के देव तेरा शुक्रिया सौंधी सौंधी धूप में छिटपुट खेलो के लिए शुक्रिया हे जगदीश्वर तेरा शुक्रिया
सिर्फ इशारों में होती महोब्बत अगर, इन अलफाजों को खुबसूरती कौन देता बस पत्थर बन के रह जाता ‘ताज महल’ अगर इश्क इसे अपनी पहचान ना देता
गुलदस्ता मेरे हाथ में चेहरे पर मुस्कान ऐ जाने वाले रखना अपना ध्यान ..
मैं तो कांच का टुकड़ा था तुमने ही हीरा बनाया, कैसे शुक्रिया अदा करूँ तूने जो जीना सिखा दिया.
बात ऐसी हो की जज़्बात कम ना हो खयालात ऐसे हों की कभी ग़म ना हो दिल के कोने में इतनी सी जगह रखना की खाली – खाली सा लगे जब हम ना हों ..
किस तरह से शुक्रिया कहें आपको, ज़मीन से उठा कर दिल में बिठा लिया, नज़रों में समां कर, पलकों पे सजा दिया, इतना प्यार दिया आपने हमको, कि मेरे बिखरे शब्दों को कविता बना दिया… Thank You