सपने धूमिल है तो क्या हुआ कभी तो सच्चे होंगे, वक़्त बुरे है तो क्या हुआ कभी तो अच्छे होंगे|

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मुर्ख की यह प्रव्रत्ति है कि वह सदैव उन लोगों का अपमान करता है जो विद्या, शील, आयु। बुद्धि, धन और कुल में श्रेष्ट हैं तथा माननीय हैं।

जो व्यवहार आपको दूसरों से पसंद ना हो ऐसा व्यवहार आप दूसरों के साथ भी ना करे

भूल जीवन का एक पेज है और रिश्ते पूरी किताब, जरूरत पड़े तो भूल का एक पेज फाड़ देना लेकिन एक छोटे से पेज के लिए पूरी किताब नही

ईश्वर पर विश्वास बच्चे की तरह करो जिसको आप हवा में उछालो तो वो हंसता है डरता नहीं, क्योंकि वो जानता है कि आप उसे गिरने नहीं दोगे, ऐसा ही विश्वास ईश्वर पर करोगें तो वो तुम्हें कभी गिरने नहीं देगा।

ख़ुशियाँ चाहे किसी के भी साथ बाँट लो "लेकिन" गम भरोसेमंद के साथ ही बाँटना चाहिए

जब अपने ही परिंदे किसी और के दाने के आदी हो जाए तो उन्हें आजाद कर देना चाहिए

मुर्ख की यह प्रव्रत्ति है कि वह सदैव उन लोगों का अपमान करता है जो विद्या, शील, आयु। बुद्धि, धन और कुल में श्रेष्ट हैं तथा माननीय हैं।

जो व्यवहार आपको दूसरों से पसंद ना हो ऐसा व्यवहार आप दूसरों के साथ भी ना करे

भूल जीवन का एक पेज है और रिश्ते पूरी किताब, जरूरत पड़े तो भूल का एक पेज फाड़ देना लेकिन एक छोटे से पेज के लिए पूरी किताब नही

ईश्वर पर विश्वास बच्चे की तरह करो जिसको आप हवा में उछालो तो वो हंसता है डरता नहीं, क्योंकि वो जानता है कि आप उसे गिरने नहीं दोगे, ऐसा ही विश्वास ईश्वर पर करोगें तो वो तुम्हें कभी गिरने नहीं देगा।

ख़ुशियाँ चाहे किसी के भी साथ बाँट लो "लेकिन" गम भरोसेमंद के साथ ही बाँटना चाहिए

जब अपने ही परिंदे किसी और के दाने के आदी हो जाए तो उन्हें आजाद कर देना चाहिए